उत्तर प्रदेश के बिजनौर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तान से विस्थापित परिवारों, पूर्व सैनिकों और लीजधारकों को भूमिधरी अधिकार पत्र वितरित किए। इस कार्यक्रम के तहत कुल 1645 परिवारों को कानूनी रूप से जमीन का मालिकाना हक प्रदान किया गया, जिसमें 50 पूर्व सैनिक भी शामिल हैं।
भूमि अधिकार से मिला कानूनी संरक्षण
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह भूमि उन परिवारों का अधिकार है, जो लंबे समय से इसके लिए पात्र थे।
- विस्थापित परिवारों को पहली बार वैधानिक स्वामित्व मिला
- पूर्व सैनिकों को भी सम्मानपूर्वक भूमि अधिकार प्रदान किए गए
- लखविंदर कौर और मिल्खा सिंह सहित कई लाभार्थियों को प्रमाण पत्र सौंपे गए
यह कदम विस्थापित और वंचित समुदायों को मुख्यधारा में जोड़ने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
विकास योजनाओं से जोड़ा गया लाभार्थियों को
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को भी सहायता प्रदान की:
- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटन पत्र
- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत चेक वितरण
सरकार का उद्देश्य है कि इन योजनाओं के माध्यम से लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
डबल इंजन सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के उत्थान, पुनर्वास, स्वावलंबन और सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
इस क्रम में आज महात्मा विदुर की पावन नगरी जनपद बिजनौर में पाकिस्तान से विस्थापित 1,645 परिवारों तथा पूर्व सैनिकों/लीजधारकों को भूमिधरी अधिकार पत्र… pic.twitter.com/6jxYBl4XcW
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 1, 2026
महिला सशक्तिकरण पर जोर
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं द्वारा संचालित “विदुर प्रेरणा कैफे” का भी उद्घाटन किया गया।
यह पहल महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पहले भी दिए गए भूमि अधिकार
योगी सरकार इससे पहले भी कई वंचित वर्गों को भूमि अधिकार प्रदान कर चुकी है:
- अप्रैल 2026 में लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से विस्थापित 331 परिवारों को भूमि अधिकार
- पूर्वी यूपी में नदी कटान प्रभावित 2350 परिवारों को स्वामित्व
- 4356 थारू जनजाति परिवारों को भूमि अधिकार पत्र
समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास
सरकार का दावा है कि इन योजनाओं का उद्देश्य उन लोगों को अधिकार और सम्मान देना है, जो वर्षों से भूमि के स्वामित्व से वंचित थे। इससे सामाजिक और आर्थिक स्थिरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
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