देश के सबसे प्रतिष्ठित और विशिष्ट क्लबों में गिने जाने वाले दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) पर गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। एक ओर केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा अवसंरचना को मजबूत करने के उद्देश्य से क्लब को 27.3 एकड़ सरकारी भूमि खाली करने का नोटिस दिया है, वहीं दूसरी ओर फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट और आंतरिक दस्तावेजों ने क्लब के कामकाज पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन सामने आए दस्तावेजों ने क्लब प्रशासन की पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय नियंत्रण को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
मृत सदस्यों के नाम पर बने खाने-पीने के बिल
फॉरेंसिक ऑडिट फर्म Baker Tilly Business Advisory Services द्वारा तैयार रिपोर्ट में वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच क्लब के कैटरिंग रिकॉर्ड की जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार, 31 ऐसे मामलों की पहचान हुई, जिनमें मृत सदस्यों के नाम पर खाने-पीने और अन्य सेवाओं के बिल जारी किए गए।
ऑडिट रिपोर्ट में आशंका जताई गई कि इन सदस्य खातों का उपयोग गैर-सदस्यों द्वारा क्लब की सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए किया गया हो सकता है। यह खुलासा क्लब की निगरानी व्यवस्था और आंतरिक नियंत्रण तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
बुजुर्ग सदस्य के कार्ड से ड्रिंक्स परोसने का आरोप
जुलाई 2026 में चाणक्यपुरी थाने में दर्ज एक शिकायत में क्लब के फूड एंड बेवरेज मैनेजर राजेश भटनागर पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक बीमार और बुजुर्ग सदस्य के कार्ड का कथित रूप से दुरुपयोग करते हुए चार अनधिकृत मेहमानों को ड्रिंक्स उपलब्ध कराईं और नकद भुगतान लिया।
राजेश भटनागर वर्तमान में क्लब के कार्यवाहक सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
क्लब के सदस्यों को ही बनाया गया वकील, करोड़ों की फीस
फॉरेंसिक रिपोर्ट में हितों के टकराव (Conflict of Interest) से जुड़े कई मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार क्लब ने अपने ही सदस्य रहे कई वरिष्ठ वकीलों को कानूनी मामलों में नियुक्त किया और उन्हें लगभग 1.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
प्रमुख भुगतान इस प्रकार बताए गए हैं:
- अरुण काथपालिया – ₹77 लाख
- गौरव मोहन लिबरहान – ₹28.76 लाख
- हरीश साल्वे – ₹20 लाख
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्ष 2016-17 से 2020-21 के बीच क्लब ने ऐसे विक्रेताओं को लगभग 36 करोड़ रुपये के ठेके दिए, जिनके निदेशक या उनके परिजन स्वयं क्लब के सदस्य थे।
5 साल में मुकदमों पर खर्च हुए ₹8.22 करोड़
क्लब की कानूनी लड़ाइयों पर होने वाला खर्च भी चर्चा का विषय बन गया है।
वित्तीय रिकॉर्ड के अनुसार:
- 2021-22 में कानूनी खर्च: ₹1.84 करोड़
- 2022-23 में कानूनी खर्च: ₹2.09 करोड़
- 2018-19 से 2022-23 के बीच कुल मुकदमेबाजी खर्च: ₹8.22 करोड़
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी निजी सदस्यता क्लब के लिए यह खर्च असामान्य रूप से अधिक माना जा सकता है।
9 साल बाद ऑडिटर ने दिया इस्तीफा
क्लब के लंबे समय से ऑडिट कर रहे ऑडिटर Khanna & Annadhanam ने मार्च 2024 में लगभग 9 वर्षों की सेवा के बाद इस्तीफा दे दिया।
अपनी ऑडिट रिपोर्टों में फर्म ने कई गंभीर आपत्तियां दर्ज की थीं, जिनमें शामिल हैं:
- बजट प्रक्रिया का अभाव
- आंतरिक ऑडिट सिस्टम नहीं होना
- डिजिटल और मैनुअल रिकॉर्ड में अंतर
- आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध न कराना
बाद में नियुक्त नए ऑडिटर AVA & Associates ने भी रिकॉर्ड तक पूर्ण पहुंच न मिलने की शिकायत दर्ज की।
PM आवास के पास ड्रोन उड़ाने का मामला भी विवादों में
जिमखाना क्लब से जुड़ा सबसे संवेदनशील मामला प्रधानमंत्री आवास की सुरक्षा से जुड़ा बताया जा रहा है।
अगस्त 2022 में क्लब परिसर से प्रधानमंत्री आवास के निकट प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने की घटना दर्ज की गई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने कथित रूप से लगभग दो मिनट तक ड्रोन गतिविधि रिकॉर्ड की थी।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले को गंभीर सुरक्षा मुद्दा बताते हुए रिपोर्ट तैयार की थी। बाद में जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपे जाने की बात सामने आई, लेकिन अब तक जांच का अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है।
जमीन विवाद भी बना हुआ है चर्चा का विषय
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा अवसंरचना के विस्तार का हवाला देते हुए क्लब को 27.3 एकड़ भूमि खाली करने का नोटिस जारी किया है। क्लब प्रशासन ने इस नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है और मामला न्यायालय में लंबित है।
जवाबदेही और पारदर्शिता पर उठे सवाल
फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट, ऑडिटरों की आपत्तियां, वित्तीय अनियमितताओं के आरोप और सुरक्षा से जुड़े मामलों ने दिल्ली जिमखाना क्लब के प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी प्रतिष्ठित संस्था में पारदर्शिता, वित्तीय जवाबदेही और मजबूत निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी विवादित परिस्थितियों से बचा जा सके।
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