मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के शाहजहानाबाद क्षेत्र स्थित शालीमार कॉन्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल एक विवाद के केंद्र में आ गया है। ईद के अवसर पर स्कूल परिसर में कथित तौर पर भैंस के पाड़े की कुर्बानी दिए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया है। मामले को लेकर हिंदू संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहजहानाबाद इलाके में मस्जिद के निकट स्थित शालीमार कॉन्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में ईद के दिन कुछ लोगों द्वारा भैंस का पाड़ा काटे जाने का वीडियो सामने आया है। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने सवाल उठाया कि एक शैक्षणिक संस्थान के परिसर का इस प्रकार उपयोग किया जाना नियमों और व्यवस्थाओं के अनुरूप है या नहीं। चूंकि स्कूल में विभिन्न समुदायों के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं, इसलिए इस घटना को लेकर अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा विवाद
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर विभिन्न संगठनों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्कूल परिसर में इस प्रकार की गतिविधि हुई है, तो यह जानना आवश्यक है कि इसकी अनुमति किसने दी और क्या संबंधित नियमों का पालन किया गया था।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि घटना के दौरान कुछ छात्र परिसर में मौजूद थे और उन्होंने पूरी घटना देखी। रिपोर्ट्स के अनुसार, बाद में बच्चों से परिसर में फैले खून, जानवरों के अवशेष और अन्य सामग्री को साफ करवाए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
School or slaughterhouse?
A buffalo was butchered inside the premises of Shalimar Convent Higher Secondary School in Shahjahanabad, Bhopal, located adjacent to a mosque
Students reportedly witnessed the slaughter and were subsequently made to clean blood, animal remains and… pic.twitter.com/esUqY4nYYK
— Rashtra Jyoti – for Sanatan Vedic Revival (@RashtraJyoti) June 15, 2026
हिंदू संगठनों ने प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
घटना की जानकारी सामने आने के बाद कई हिंदू संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन से संपर्क किया। संगठनों का कहना है कि यदि स्कूल परिसर का उपयोग इस प्रकार की गतिविधियों के लिए किया गया है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि शैक्षणिक संस्थानों का वातावरण बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और शिक्षा के अनुकूल होना चाहिए तथा परिसर के उपयोग को लेकर निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा मामला
इस विवाद ने अब राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया है। कल्याणकारी संस्था सेवा न्याय ने इस मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के समक्ष उठाया है। संस्था का आरोप है कि यदि बच्चों के सामने ऐसी घटना हुई और उनसे परिसर की सफाई करवाई गई, तो यह बच्चों के अधिकारों, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है।
संस्था ने NHRC से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और बच्चों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही यह भी अनुरोध किया गया है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन और पुलिस की ओर से जांच की प्रक्रिया जारी रहने की बात कही जा रही है। वायरल वीडियो की सत्यता, घटना की परिस्थितियों और लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही प्रशासनिक स्तर पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।
इस बीच, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर बहस जारी है। विभिन्न पक्षों की ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं, जबकि जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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