पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ तब आया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनाव याचिका (Election Petition) दायर की। इस सीट पर भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,104 वोटों के अंतर से हराया था।
याचिका दाखिल करने के बाद ममता बनर्जी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, डोला सेना और कल्याण बनर्जी के साथ हाई कोर्ट परिसर से बाहर निकलती नजर आईं। बताया गया कि वह याचिका से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कोर्ट पहुँची थीं।
शुभेंदु अधिकारी ने दर्ज की बड़ी जीत
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार भवानीपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी को 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोट प्राप्त हुए। इस प्रकार शुभेंदु अधिकारी ने 15,104 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
वहीं तीसरे स्थान पर सीपीएम उम्मीदवार श्रीजीब विश्वास रहे, जिन्हें 3,556 वोट मिले। मतगणना के शुरुआती चरणों में ममता बनर्जी बढ़त बनाए हुए थीं, लेकिन बाद के राउंड में शुभेंदु अधिकारी ने लगातार बढ़त हासिल करते हुए चुनाव अपने नाम कर लिया।
मतगणना प्रक्रिया पर उठाए सवाल
ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में मतगणना प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि मतगणना केंद्र पर उनके एजेंटों को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए थे और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए।
क्यों रोकी गई थी काउंटिंग?
मतगणना के दिन भवानीपुर स्थित सखावत मेमोरियल स्कूल में कुछ समय के लिए वोटों की गिनती रोक दी गई थी। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार एक व्यक्ति मोबाइल फोन लेकर मतगणना केंद्र के अंदर प्रवेश कर गया था, जिसके कारण सुरक्षा नियमों के तहत अस्थायी रूप से काउंटिंग रोकनी पड़ी।
हालाँकि बाद में स्थिति सामान्य होने पर मतगणना फिर शुरू कर दी गई थी।
TMC में चुनाव बाद बढ़ा राजनीतिक संकट
विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर बड़े पैमाने पर राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली है। पार्टी के कई सांसदों और विधायकों द्वारा नेतृत्व के खिलाफ असंतोष जताने की खबरें सामने आई हैं।
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच लोकसभा में TMC के कई सांसदों ने अलग राजनीतिक रणनीति अपनाते हुए दूसरे राजनीतिक मंचों से जुड़ने की प्रक्रिया शुरू की। वहीं राज्य विधानसभा में भी कई विधायकों द्वारा अलग राजनीतिक पहचान की मांग किए जाने से बंगाल की राजनीति में हलचल बनी हुई है।
हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
अब सभी की नजरें कलकत्ता हाई कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। यदि अदालत याचिका को सुनवाई के योग्य मानती है तो चुनाव प्रक्रिया, मतगणना व्यवस्था और लगाए गए आरोपों की विस्तृत जांच हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पश्चिम बंगाल की आगामी राजनीतिक दिशा और विपक्ष-सरकार के समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।
फिलहाल ममता बनर्जी ने कानूनी लड़ाई का रास्ता चुनते हुए चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती दे दी है, जबकि भाजपा इस जीत को जनता के जनादेश की जीत बता रही है।
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