उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास (Redevelopment) को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। रेलवे स्टेशन को आधुनिक मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित करने की योजना के तहत आसपास के अतिक्रमण और निर्माणों को हटाने का अभियान तेज कर दिया गया है। इसी क्रम में स्टेशन के निकट स्थित गन शहीदा मस्जिद को हटाने के लिए प्रशासन ने नोटिस जारी करते हुए 20 जून 2026 तक परिसर खाली करने की समय-सीमा निर्धारित की है।
प्रशासन का कहना है कि जिस भूमि पर मस्जिद स्थित है, वह रेलवे की संपत्ति है और स्टेशन विस्तार तथा विकास कार्यों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र को खाली कराना आवश्यक है। नोटिस के अनुसार, रेलवे परियोजना के तहत स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्रों का व्यापक आधुनिकीकरण किया जाना है, जिसके लिए संबंधित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है।
मॉडल स्टेशन परियोजना के तहत तेज हुई कार्रवाई
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, काशी रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए स्टेशन परिसर के आसपास मौजूद अवैध या विवादित निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया चलाई जा रही है।
इससे पहले भी प्रशासन ने किला कोहना (राजघाट) क्षेत्र में स्थित हनुमान मंदिर, अजगेब शहीद मस्जिद और एक मजार को हटाने की कार्रवाई की थी। संबंधित पक्षों को पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे और कानूनी प्रक्रिया के बाद भूमि खाली कराई गई थी।
अब गन शहीदा मस्जिद को लेकर जारी नोटिस ने एक बार फिर स्थानीय स्तर पर चर्चा और विवाद को जन्म दे दिया है।

मस्जिद इंतजामिया ने नोटिस पर जताई आपत्ति
मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने प्रशासन द्वारा जारी नोटिस पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कमेटी का कहना है कि नोटिस में कई कानूनी खामियां हैं।
इंतजामिया की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नोटिस पर किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं और न ही उसमें जारी किए जाने की तारीख अंकित है। ऐसे में नोटिस की वैधता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
कमेटी ने यह भी दावा किया कि नोटिस में जिस मुकदमे के खारिज होने का उल्लेख किया गया है, वह मस्जिद परिसर से संबंधित नहीं बल्कि मस्जिद के बाहर पूर्व दिशा में स्थित भूमि से जुड़ा मामला था। इसलिए मस्जिद प्रशासन का कहना है कि नोटिस भ्रामक तथ्यों के आधार पर जारी किया गया है।
प्रशासन और मस्जिद पक्ष के बीच बढ़ सकता है कानूनी विवाद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मस्जिद प्रबंधन नोटिस को चुनौती देता है तो मामला अदालत तक पहुँच सकता है। फिलहाल प्रशासन अपनी कार्रवाई को रेलवे विकास परियोजना का हिस्सा बता रहा है, जबकि मस्जिद पक्ष नोटिस की वैधता और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
20 जून की निर्धारित समय-सीमा नजदीक आने के साथ ही इस मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच होने वाले निर्णय से इस विवाद की दिशा तय होगी।
काशी स्टेशन पुनर्विकास परियोजना क्यों है महत्वपूर्ण?
वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण केंद्र और राज्य सरकार दोनों शहर के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर विशेष जोर दे रहे हैं। काशी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास भी इसी व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके तहत यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं, बेहतर कनेक्टिविटी और विश्वस्तरीय स्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इसी कारण रेलवे प्रशासन परियोजना से जुड़ी भूमि को खाली कराने और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के प्रयास कर रहा है।
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