महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने अलग गुट बनाकर पार्टी नेतृत्व से दूरी बना ली। दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई संख्या पूरी होने के कारण इन सांसदों को लोकसभा में स्वतंत्र समूह के रूप में मान्यता मिल गई है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, यह घटनाक्रम दिल्ली में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के साथ हुई बैठक के बाद सामने आया है। इस घटनाक्रम को राजनीतिक गलियारों में “ऑपरेशन टाइगर” की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
किन सांसदों ने बनाया अलग गुट?
स्वतंत्र समूह बनाने वाले सांसदों में शामिल हैं:
- संजय जाधव
- संजय देशमुख
- नागेश पाटिल अष्टीकर
- ओमराजे निंबालकर
- भाऊसाहेब वाकचौरे
- संजय दीना पाटिल
इन छह सांसदों ने फिलहाल किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय नहीं किया है, बल्कि लोकसभा में एक स्वतंत्र समूह के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
दलबदल कानून के तहत मिला संरक्षण
लोकसभा में शिवसेना (UBT) के कुल 9 सांसद हैं। दलबदल विरोधी कानून के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद अलग होकर नया समूह बनाते हैं तो उन्हें अयोग्यता से संरक्षण मिल सकता है।
चूंकि 9 सांसदों का दो-तिहाई आंकड़ा 6 होता है और बागी सांसदों की संख्या भी 6 है, इसलिए उन्हें अलग समूह के रूप में मान्यता मिल गई है। इसके बाद इन सांसदों पर पार्टी व्हिप और संगठनात्मक निर्देश लागू नहीं होंगे।
अरविंद सावंत बने रहे ठाकरे खेमे के साथ
इस पूरे घटनाक्रम के बीच शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और लंबे समय से ठाकरे परिवार के करीबी रहे अरविंद सावंत बागी गुट में शामिल नहीं हुए। वह अब भी पार्टी के संसदीय दल के नेता बने हुए हैं।
बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे गुट ने हालात की समीक्षा के लिए सभी सांसदों की आपात बैठक बुलाई है।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ी हलचल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद उद्धव ठाकरे के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। इससे पहले एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना का नाम और चुनाव चिन्ह शिंदे गुट को मिल चुका है।
अब लोकसभा में सांसदों के इस नए समीकरण से महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई और तेज हो सकती है।
अदालत का रुख कर सकता है ठाकरे गुट
सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) इस फैसले को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि सांसदों के इस कदम का संगठन पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा, इसलिए आगे की रणनीति जल्द तय की जाएगी।
फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह स्वतंत्र गुट भविष्य में किस राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ता है और क्या यह अंततः शिंदे गुट में औपचारिक रूप से शामिल होता है।
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