प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 4 जुलाई 2026 को राजस्थान के जोधपुर एयरपोर्ट के नए अत्याधुनिक टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने Modified UDAN Scheme की शुरुआत की और राजस्थान में बुनियादी ढाँचे, ऊर्जा, रेलवे, सड़क, शहरी परिवहन तथा अक्षय ऊर्जा से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं को देश और प्रदेश को समर्पित किया।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, जोधपुर एयरपोर्ट का नया टर्मिनल ₹480 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है। 23,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैली यह इमारत सालाना 20 लाख यात्रियों की आवाजाही संभालने के लिए डिजाइन की गई है। राजस्थान की शाही विरासत से प्रेरित टर्मिनल में पारंपरिक मेहराब और झरोखों को आधुनिक वास्तुकला के साथ जोड़ा गया है।
नए टर्मिनल से यात्रियों को आधुनिक और बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ जोधपुर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन, व्यापार, निवेश तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने राजस्थान दौरे के दौरान करीब ₹1.06 लाख करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण, उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।
#WATCH | Balotra, Rajasthan | Prime Minister Narendra Modi flags off refinery production tankers from the Greenfield Refinery-cum-Petrochemical Complex, developed as a joint venture between Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) and the Rajasthan Government, which PM Modi… pic.twitter.com/YHAZSdihQE
— ANI (@ANI) July 4, 2026
ऊर्जा संकट पर पीएम मोदी का बड़ा बयान
राजस्थान में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में युद्ध और तनाव के कारण पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट पर विस्तार से बात की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष ने भारत सहित पूरी दुनिया के सामने गंभीर ऊर्जा चुनौती खड़ी कर दी थी। तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई, प्रमुख समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।
पीएम मोदी के अनुसार, ऐसे मुश्किल समय में भारत ने घबराहट के बजाय समय रहते संकट का आकलन किया, सही फैसले लिए, अपने संसाधनों का संतुलित इस्तेमाल किया और कूटनीतिक संबंधों का सकारात्मक उपयोग किया। उन्होंने इसे 21वीं सदी के नए भारत की इच्छाशक्ति और रणनीतिक क्षमता का उदाहरण बताया।
#WATCH | Balotra, Rajasthan | Prime Minister Narendra Modi says, "Today is a witness that the BJP governments do not leave projects just after laying the foundation stone. Instead, we work day and night to complete those projects. Two months ago, we laid the foundation stone… https://t.co/D1gIyOFrul pic.twitter.com/f6yMROAnaK
— ANI (@ANI) July 4, 2026
‘सही फैसले, सही समय और असरदार रणनीति से संकट पर पाया काबू’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऊर्जा संकट से मुकाबले में भारत की सफलता किसी एक निर्णय का परिणाम नहीं थी। सरकार ने कई स्तरों पर एक साथ रणनीति बनाई।
एक तरफ घरेलू ऊर्जा उत्पादन और रिफाइनरी क्षमता का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया गया, तो दूसरी तरफ आयात के लिए नए देशों और वैकल्पिक मार्गों की तलाश की गई। इसके साथ भारत ने अपनी कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने का प्रयास किया।
पीएम मोदी के मुताबिक, इसी संयुक्त रणनीति के कारण भारत वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद अपनी ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को बड़े संकट से बचाने में सफल रहा।
#WATCH | Balotra, Rajasthan | Prime Minister Narendra Modi says, "… The West Asia war has given rise to the biggest energy crisis of the 21st century… The willpower and efforts of the new India of the 21st century have overcome this biggest energy crisis of the 21st century.… pic.twitter.com/05GPA7PXoy
— ANI (@ANI) July 4, 2026
पश्चिम एशिया संकट से भारत के सामने कितनी बड़ी चुनौती थी?
पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा आपूर्ति की थी। भारत अपनी जरूरत के कच्चे तेल और LPG का बड़ा हिस्सा विदेशों से हासिल करता है।
संकट के दौरान प्रमुख समुद्री मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आपूर्ति पर गंभीर दबाव पैदा हुआ। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत ने कच्चे तेल की खरीद के स्रोतों में विविधता बढ़ाई।
मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने बताया था कि भारत करीब 40 देशों से कच्चा तेल हासिल कर रहा है और लगभग 70 प्रतिशत क्रूड आयात ऐसे मार्गों से आ रहा है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर हैं। इस रणनीतिक विविधीकरण ने वैश्विक संकट के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
#WATCH | Balotra, Rajasthan | Prime Minister Narendra Modi says, "… About 60% of our LPG requirements were met through imports, with 90% of that supply coming from Gulf nations, passing through Hormuz, when suddenly, war conditions brought that supply to a near-halt. You can… pic.twitter.com/LUdTO29QRl
— ANI (@ANI) July 4, 2026
40 से ज्यादा देशों से ऊर्जा आपूर्ति का रास्ता
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत के मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंधों और ऊर्जा आयात के विविधीकरण का उल्लेख किया।
सरकारी जानकारी के अनुसार, भारत ने पिछले वर्षों में अपने कच्चे तेल के आपूर्तिकर्ताओं की संख्या बढ़ाकर लगभग 40 से अधिक देशों तक पहुँचाई है। इसका उद्देश्य किसी एक क्षेत्र या सीमित देशों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना और संकट की स्थिति में वैकल्पिक आपूर्ति बनाए रखना है।
ऊर्जा संकट के दौरान भारत की यही रणनीति काम आई। अलग-अलग देशों से कच्चे तेल की खरीद और वैकल्पिक समुद्री मार्गों के इस्तेमाल ने घरेलू बाजार में बड़े स्तर की आपूर्ति बाधा को रोकने में मदद की।
प्रधानमंत्री ने इस रणनीति को भारत की कूटनीतिक ताकत से जोड़ते हुए कहा कि संकट के समय दूसरे देशों के साथ भारत के मजबूत रिश्ते देशहित में उपयोगी साबित हुए।
#WATCH | Balotra, Rajasthan | Prime Minister Narendra Modi says, "The crisis affecting diesel and petrol prices due to the war was also severe. Our country does not possess vast oil reserves. As the crisis escalated, crude oil prices surged from $70 to $120 per barrel, and import… pic.twitter.com/iuAmIHaV3d
— ANI (@ANI) July 4, 2026
अफवाह और डर फैलाने वालों पर पीएम मोदी का निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में उन लोगों और समूहों पर भी निशाना साधा, जिन पर उन्होंने संकट के दौरान जनता में डर और भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया।
पीएम मोदी ने कहा कि जब सरकार और उसकी एजेंसियां ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही थीं, तब कुछ ताकतें अफवाहों और भय का माहौल बनाने में लगी थीं।
उनके मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में छोटी-मोटी स्थानीय समस्याओं को छोड़कर ईंधन आपूर्ति में कोई ऐसा बड़ा संकट नहीं आने दिया गया, जिससे सामान्य जनजीवन ठप हो जाए।
सरकार ने भी मार्च 2026 में सोशल मीडिया पर ईंधन की कथित कमी से जुड़े दावों का खंडन करते हुए कहा था कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित है और तेल कंपनियां लगातार आपूर्ति बनाए रखने के लिए काम कर रही हैं।
अप्रैल से जून के बीच तेल कंपनियों को करीब ₹75 हजार करोड़ का नुकसान
वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और LPG को बाजार लागत से कम कीमत पर बेचने के कारण करीब ₹74,781 करोड़ का नुकसान हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस आर्थिक बोझ का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने आम नागरिकों को अचानक और भारी मूल्य वृद्धि से बचाने को प्राथमिकता दी।
सरकार की रणनीति यह थी कि वैश्विक ऊर्जा संकट का पूरा बोझ सीधे आम जनता तक न पहुँचे और देश में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति भी लगातार जारी रहे।
#WATCH | Balotra, Rajasthan | On fuel shortages in India amid the West Asia conflict, Prime Minister Narendra Modi says, "Attempts were made to frighten and mislead people. Political games were played. Yet, those with malicious intent did not succeed. Even in remote areas, apart… pic.twitter.com/d9NRkghQ3V
— ANI (@ANI) July 4, 2026
पेट्रोल-डीजल पर ₹10 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई
ऊर्जा संकट के दौरान केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2026 को पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर घटाने का फैसला किया था।
सरकार ने स्पष्ट किया था कि इस फैसले का उद्देश्य तेल विपणन कंपनियों के भारी नुकसान को आंशिक रूप से कम करना और पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों को अचानक बढ़ने से रोकना था।
उस समय अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण सरकारी तेल कंपनियों को भारी अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा था। केंद्र ने कर राजस्व पर असर स्वीकार करते हुए उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से बचाने की रणनीति अपनाई।
पीएम मोदी ने कहा कि संकट के दौरान सरकार का लक्ष्य केवल तेल कंपनियों को संभालना नहीं था, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना था कि आम परिवारों और देश की अर्थव्यवस्था पर अचानक असहनीय बोझ न पड़े।
संकट के बीच घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर
भारत ने ऊर्जा संकट से मुकाबले में केवल आयात पर निर्भर रहने की जगह घरेलू क्षमता का भी ज्यादा इस्तेमाल किया।
संकट के दौरान रिफाइनरियों को अपनी उत्पादन रणनीति बदलने और LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए। प्रधानमंत्री के अनुसार, कुछ रिफाइनरियों ने ऐसे उत्पादों का उत्पादन शुरू किया, जिन्हें वे पहले नहीं बनाती थीं।
ताजा रिपोर्ट के अनुसार, संकट के दौरान घरेलू LPG उत्पादन 35,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 54,000 मीट्रिक टन तक पहुँचाया गया। प्रधानमंत्री ने इसे आपात स्थिति में देश की रिफाइनरी क्षमता के तेज और प्रभावी उपयोग का उदाहरण बताया।
LPG संकट से निपटने के लिए PNG कनेक्शन पर भी जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने घरेलू रसोई गैस की मांग का पूरा दबाव केवल LPG सिलेंडर पर नहीं रहने दिया।
इसके लिए पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG कनेक्शन तेजी से बढ़ाने का अभियान चलाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, संकट के दौरान कम समय में 11 लाख से अधिक घरों को PNG से जोड़ा गया।
इस रणनीति का उद्देश्य LPG की मांग पर दबाव कम करना और वैकल्पिक घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करना था।
पीएम मोदी ने दावा किया कि वैश्विक संकट की गंभीरता को देखते हुए घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बहुत अधिक बढ़ सकती थी, लेकिन सरकारी हस्तक्षेप के कारण उस स्तर की मूल्य वृद्धि से बचा गया।
‘राष्ट्रहित और नागरिकों का हित सर्वोपरि’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी वैश्विक संकट के समय देश का राष्ट्रीय हित और नागरिकों का हित सबसे ऊपर रहेगा।
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार का मूल मंत्र ‘नागरिक देवो भव:’ है।
उन्होंने ऊर्जा संकट के दौरान उठाए गए फैसलों को इसी नीति से जोड़ते हुए कहा कि सरकारी खजाने, तेल कंपनियों और पूरी प्रशासनिक व्यवस्था ने मिलकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि वैश्विक युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता का पूरा बोझ सीधे भारतीय नागरिकों पर न पड़े।
जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल से पर्यटन और व्यापार को नई उड़ान
ऊर्जा संकट पर संबोधन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजस्थान दौरा विकास परियोजनाओं के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण रहा।
जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल में आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ राजस्थान की पारंपरिक वास्तुकला की झलक देखने को मिलती है। मेहराब, झरोखे और स्थानीय विरासत से प्रेरित डिजाइन को आधुनिक तकनीक और हरित भवन सुविधाओं के साथ जोड़ा गया है।
टर्मिनल में ऊर्जा दक्ष प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय और पर्यावरण अनुकूल तकनीक शामिल की गई है। इसे 5-स्टार GRIHA रेटिंग के लक्ष्य के साथ विकसित किया गया है।
नए टर्मिनल से जोधपुर की एयर कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ राजस्थान के पर्यटन, होटल, व्यापार, स्थानीय हस्तशिल्प और रोजगार क्षेत्रों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
Modified UDAN Scheme की शुरुआत
जोधपुर में प्रधानमंत्री मोदी ने Modified UDAN Scheme की भी शुरुआत की।
इस योजना के लिए अगले 10 वर्षों में ₹28,840 करोड़ का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत देश में बंद या इस्तेमाल नहीं हो रही हवाई पट्टियों से 100 नए एयरोड्रम विकसित करने, दुर्गम इलाकों में 200 आधुनिक हेलीपैड बनाने और क्षेत्रीय विमान सेवाओं को आर्थिक सहायता देने की योजना है।
इस पहल का उद्देश्य छोटे शहरों, दूरदराज के क्षेत्रों और कठिन भौगोलिक इलाकों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है।
राजस्थान को ₹1.06 लाख करोड़ की परियोजनाओं की सौगात
राजस्थान दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बालोतरा में करीब ₹1.06 लाख करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।
इन परियोजनाओं में पेट्रोकेमिकल, सड़क, रेलवे, मेट्रो, अक्षय ऊर्जा और पावर ट्रांसमिशन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने पचपदरा में भारत के पहले ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी-कम-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को भी राष्ट्र को समर्पित किया। करीब ₹79,450 करोड़ के निवेश से विकसित यह प्रोजेक्ट भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोकेमिकल आत्मनिर्भरता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऊर्जा संकट से भारत ने दुनिया को दिया क्या संदेश?
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का केंद्रीय संदेश यह रहा कि आज का भारत वैश्विक संकटों का केवल इंतजार करने वाला देश नहीं है, बल्कि समय रहते रणनीति बनाकर अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम है।
ऊर्जा आयात में विविधता, 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल की खरीद, घरेलू रिफाइनरी क्षमता का इस्तेमाल, वैकल्पिक मार्गों से आपूर्ति, एक्साइज ड्यूटी में कटौती और तेल कंपनियों के भारी नुकसान के बावजूद घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखना—इन सभी कदमों को सरकार भारत की संकट प्रबंधन क्षमता के उदाहरण के रूप में पेश कर रही है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में साफ संदेश दिया कि कठिन वैश्विक परिस्थितियों में भारत की नीति का केंद्र राष्ट्रहित, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों को राहत देना रहेगा।
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