उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के हंडिया थाना क्षेत्र में 22 दिन के भीतर दो सगे भाइयों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। बनपुरवा सरायपीथा गांव में एक ही परिवार के दो युवकों के शव अलग-अलग दिनों में फंदे से लटके मिलने के बाद मामला गंभीर राजनीतिक और आपराधिक विवाद में बदल गया है।
शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 की सुबह सुशील कुमार का शव घर के पास बने एक बिना दरवाजे वाले टिन शेड के कमरे में फंदे से लटका मिला। इससे 22 दिन पहले, 11 जून को उनके छोटे भाई संतोष कुमार का शव भी बस्ती के पास एक पेड़ से लटका मिला था।
परिवार ने दोनों मौतों को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने हंडिया से समाजवादी पार्टी के विधायक हाकिम लाल बिंद समेत पांच लोगों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की है।
3 जुलाई को टिन शेड में मिला सुशील का शव
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बनपुरवा सरायपीथा निवासी सुशील कुमार बृहस्पतिवार की रात खाना खाने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों के साथ सोने चले गए थे।
शुक्रवार सुबह उनका शव घर के बगल में भूसा और अनाज रखने के लिए बने बिना दरवाजे वाले टिन शेड के कमरे में फंदे से लटका मिला। शव देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए।
सुशील की उम्र को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में अंतर है। अमर उजाला ने उनकी उम्र 32 वर्ष बताई है, जबकि जागरण और कुछ अन्य रिपोर्टों में 35 वर्ष लिखी गई है। इसलिए आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड सामने आने तक उम्र के आंकड़े पर सावधानी जरूरी है।
22 दिन पहले छोटे भाई संतोष की भी इसी तरह हुई थी मौत
सुशील की मौत ने परिवार के पुराने घाव फिर हरे कर दिए। उनके छोटे भाई संतोष कुमार का शव भी 11 जून 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में बस्ती के पास एक पेड़ से लटका मिला था।
रिपोर्टों के अनुसार, संतोष की शादी कुछ ही दिन पहले हुई थी और विवाह के चौथे दिन उनका शव फंदे से लटका मिला। परिवार ने उस समय भी हत्या की आशंका जताई थी।
अब महज 22 दिन बाद दूसरे भाई सुशील की भी लगभग उसी तरह मौत होने के बाद परिवार और ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया। परिजनों ने सवाल उठाया कि एक ही घर के दो भाइयों की इतने कम समय के भीतर फंदे से लटकी लाशें मिलने के पीछे क्या कोई बड़ी साजिश है।
नौ घंटे तक नहीं उठने दिया शव
सुशील का शव मिलने के बाद ग्रामीण और परिवार के लोग मौके पर जुट गए। पुलिस जब शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने पहुँची तो लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और उच्च अधिकारियों को मौके पर बुलाने की मांग की।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह करीब छह बजे से दोपहर बाद तीन बजे तक लगभग नौ घंटे हंगामा चलता रहा। परिजन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े रहे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एडीएम प्रशासन एवं वित्त विनीता सिंह, डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत, एडीसीपी पुष्कर वर्मा, एसडीएम आकांक्षा सिंह, कई थानों की पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुँची। कार्रवाई और सहायता का आश्वासन मिलने के बाद लोगों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने दिया।
धनूपुर बाजार में सड़क जाम कर प्रदर्शन
दो भाइयों की संदिग्ध मौत से नाराज ग्रामीणों और परिजनों ने धनूपुर बाजार में भी विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने हंडिया-शुकुलपुर मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाकर करीब दो घंटे तक रास्ता जाम रखा। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से जांच और कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद यातायात बहाल हो सका।
घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
सपा विधायक हाकिम लाल बिंद समेत पांच पर हत्या की FIR
परिवार की ओर से दिए गए शिकायती पत्र के बाद पुलिस ने हंडिया से समाजवादी पार्टी के विधायक हाकिम लाल बिंद समेत पांच लोगों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की है।
रिपोर्टों के मुताबिक, मृतक के भाई सुनील कुमार की शिकायत में निम्न नाम शामिल हैं:
1. हाकिम लाल बिंद — सपा विधायक, हंडिया
2. सुमित्रा नंदिनी — गायिका
3. अमित गौतम — सुमित्रा नंदिनी का भाई
4. गौरी
5. संजय गौतम — गौरी का जीजा
परिवार ने इन लोगों पर हत्या और साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया है। एडीएम के निर्देश के बाद हंडिया पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि FIR में नाम दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। आरोपों की सत्यता पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
परिवार ने जमीन विवाद को बताया दोनों मौतों की वजह
मृतकों के परिवार ने पूरे मामले के पीछे जमीन विवाद होने का आरोप लगाया है।
परिजनों का दावा है कि परिवार की पुश्तैनी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था और मृतक भाई अपने अधिकार के लिए कानूनी पैरवी कर रहे थे। परिवार ने आरोप लगाया है कि इसी विवाद के कारण उन्हें धमकियां मिल रही थीं और दोनों भाइयों की हत्या कर शवों को फंदे से लटकाया गया ताकि मामला आत्महत्या जैसा दिखाई दे। मुख्यधारा की रिपोर्टों में परिवार द्वारा जमीन विवाद को मौतों से जोड़ने की पुष्टि होती है, लेकिन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
कुछ रिपोर्टों में परिवार की ओर से चार बीघा आठ बिस्वा पुश्तैनी जमीन और करीब दो करोड़ रुपये की कथित बाजार कीमत का दावा किया गया है। हालांकि, इस जमीन के स्वामित्व, बाजार मूल्य और कथित कब्जे से जुड़े दावों की राजस्व रिकॉर्ड से सार्वजनिक रूप से अंतिम पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
इसी कारण पुलिस के लिए जमीन से जुड़े दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड और अदालत में चल रहे कथित विवाद की जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
परिवार का दावा—दोनों मौतें आत्महत्या नहीं, हत्या हैं
परिजनों का कहना है कि दोनों भाइयों की मौत की परिस्थितियां गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
परिवार का आरोप है कि पहले संतोष और फिर सुशील की हत्या की गई। उन्होंने दावा किया कि शवों को फंदे से लटकाकर घटनाओं को आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया गया।
हालांकि, अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य और अन्य वैज्ञानिक जांच के अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुए हैं। इसलिए दोनों मौतों की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।
शादी के कुछ दिन बाद संतोष की मौत ने खड़े किए थे सवाल
छोटे भाई संतोष की मौत का मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि उनकी शादी कुछ ही दिन पहले हुई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, शादी के चौथे दिन संतोष का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ से लटका मिला। उस समय भी परिवार ने हत्या की आशंका जताई थी।
परिवार का कहना है कि पहली मौत के बाद अगर मामले की गहराई से जांच और प्रभावी कार्रवाई हुई होती, तो शायद दूसरी घटना को लेकर पैदा हुए सवालों से बचा जा सकता था। यह परिवार का आरोप है और पुलिस जांच में इसकी भी समीक्षा होनी बाकी है।
पुलिस ने जांच और गिरफ्तारी के लिए गठित की टीम
एसीपी हंडिया शेषधर पांडेय के मुताबिक, परिजनों की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर दी गई है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की गई है।
डीसीपी गंगानगर कुलदीप सिंह गुनावत ने मीडिया को बताया कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, गौरी नाम की एक आरोपी को हिरासत में भी लिया गया था।
पुलिस जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य, घटनास्थल की परिस्थितियां, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, कथित धमकियों, जमीन विवाद और संबंधित लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
विधायक हाकिम लाल बिंद ने आरोपों को पूरी तरह नकारा
सपा विधायक हाकिम लाल बिंद ने खुद पर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है।
उन्होंने कहा कि उनका घटना से कोई संबंध नहीं है और वे मृतक को नहीं जानते थे। विधायक ने दावा किया कि उनके खिलाफ दर्ज मामला उनकी राजनीतिक छवि खराब करने की साजिश है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
विधायक का पक्ष है कि घटनास्थल उनके निवास से काफी दूर है और FIR में नामजद अन्य लोगों को भी वे नहीं जानते।
अब पुलिस जांच को परिवार के आरोपों और विधायक के इनकार—दोनों पक्षों की पड़ताल करनी होगी।
दो मौतें, एक जैसा तरीका और कई अनसुलझे सवाल
इस मामले में कई गंभीर सवालों के जवाब अभी मिलने बाकी हैं।
क्या दोनों मौतें आत्महत्या थीं या किसी आपराधिक साजिश का परिणाम? क्या दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध है? जमीन विवाद की वास्तविक प्रकृति क्या है? क्या परिवार को वास्तव में धमकियां मिली थीं? और दोनों भाइयों की मौत से पहले उनकी गतिविधियों और संपर्कों से क्या कोई महत्वपूर्ण सुराग मिलता है?
इन सवालों का जवाब केवल फॉरेंसिक जांच, पोस्टमार्टम निष्कर्ष, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, राजस्व दस्तावेज और गवाहों के बयान से ही सामने आ सकता है।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील हुआ मामला
एक मौजूदा विधायक के खिलाफ हत्या की FIR दर्ज होने के कारण मामला राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील हो गया है।
हाकिम लाल बिंद वर्तमान में हंडिया विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। पुलिस जांच में उनका नाम शिकायत के आधार पर शामिल किया गया है और उन्होंने आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज किया है।
ऐसे में जांच एजेंसियों पर पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से पड़ताल करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।
पोस्टमार्टम और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर टिकी जांच
दोनों भाइयों की मौत का सच सामने लाने में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच सबसे महत्वपूर्ण होगी।
जांच में यह देखा जाएगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था, फंदे की प्रकृति कैसी थी, घटनास्थल पर संघर्ष के निशान थे या नहीं, शव की स्थिति क्या बताती है और क्या किसी अन्य व्यक्ति की मौजूदगी के वैज्ञानिक प्रमाण मिले हैं।
साथ ही कथित जमीन विवाद से जुड़े राजस्व दस्तावेज और परिवार द्वारा लगाए गए धमकी के आरोप भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
परिवार को न्याय का इंतजार
22 दिनों के भीतर दो बेटों की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
सुशील अपने पीछे पत्नी और बच्चों को छोड़ गए हैं। परिवार अब दोनों मौतों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। ग्रामीण भी मामले में जल्द निष्कर्ष और पारदर्शी कार्रवाई चाहते हैं।
फिलहाल मामला पुलिस जांच के अधीन है। जांच पूरी होने से पहले किसी भी नामजद व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन एक ही परिवार के दो भाइयों की 22 दिनों के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
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