जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में पुलिस ने पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मोहम्मद रफीक नाइक को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि रफीक नाइक जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े विदेशी आतंकवादियों को पनाह, भोजन, जरूरी सामान और सुरक्षा बलों की गतिविधियों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपित किश्तवाड़ के छात्रू इलाके में सक्रिय आतंकवादी मॉड्यूल का प्रमुख ग्राउंड हैंडलर था। उसकी गिरफ्तारी को क्षेत्र में विदेशी आतंकवादियों को समर्थन देने वाले संगठित नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।
मस्जिद में मौलवी था मोहम्मद रफीक नाइक
मोहम्मद रफीक नाइक किश्तवाड़ के सिंहपुर के डवाथर गाँव का निवासी है। वह कलासोई क्षेत्र की एक मस्जिद में मौलवी के रूप में काम कर रहा था।
पुलिस की प्रारंभिक जाँच में सामने आया है कि वह जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े स्वयंभू कमांडर सैफुल्ला के नेतृत्व वाले आतंकी समूह के लिए मुख्य स्थानीय संपर्क और ग्राउंड हैंडलर की भूमिका निभा रहा था।
पाकिस्तानी आतंकियों को दी पनाह और रसद
किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नरेश सिंह के अनुसार, रफीक नाइक छात्रू क्षेत्र में आतंकवादी समूह के लिए सुरक्षित ठिकानों और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करता था।
आरोप है कि उसने पाकिस्तानी आतंकी कमांडर सैफुल्ला और उसके साथियों को सुरक्षित पनाह देने के साथ भोजन, दैनिक जरूरत का सामान और स्थानीय स्तर पर तालमेल स्थापित करने में सहायता की।
पुलिस की जाँच में यह भी सामने आया है कि आरोपित सुरक्षा बलों की आवाजाही से संबंधित जानकारी आतंकवादियों तक पहुँचाता था, जिससे आतंकियों को जंगलों में छिपे रहने और सुरक्षाबलों से बचने में मदद मिलती थी।
दो वर्षों तक जंगलों में छिपा रहा आतंकी समूह
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क की सहायता के कारण सैफुल्ला समूह के आतंकी लगभग दो वर्षों तक छात्रू क्षेत्र के घने जंगलों में छिपे रहे।
इसके बाद सुरक्षा बलों ने अलग-अलग अभियानों और मुठभेड़ों में इस समूह के सभी सात आतंकवादियों को मार गिराया। इनमें चार आतंकवादी पिछले वर्ष मारे गए थे, जबकि कमांडर सैफुल्ला सहित अंतिम तीन आतंकियों को फरवरी में हुई कार्रवाई में ढेर किया गया था।
स्कूल टीचर समेत दो अन्य मददगार पहले हो चुके गिरफ्तार
मोहम्मद रफीक नाइक की गिरफ्तारी से पहले पुलिस ने इसी मामले में मुनीर अहमद और मशकूर अहमद नामक दो अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार किया था। दोनों छात्रू क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं।
जाँच सूत्रों के अनुसार, स्कूल शिक्षक मशकूर अहमद पर आतंकवादी मॉड्यूल को लॉजिस्टिक और कम्युनिकेशन सपोर्ट उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस का मानना है कि यह अलग-अलग लोगों की सामान्य सहायता नहीं, बल्कि विदेशी आतंकवादियों को शरण और संसाधन उपलब्ध कराने वाला एक संगठित नेटवर्क था।
आतंकियों के सपोर्ट नेटवर्क की रीढ़ टूटी
पुलिस के मुताबिक, मुनीर अहमद, मशकूर अहमद और अब मोहम्मद रफीक नाइक की गिरफ्तारी से छात्रू और आसपास के इलाकों में सक्रिय आतंकी सपोर्ट नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
सुरक्षा एजेंसियाँ अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित लोगों, स्थानीय मददगारों और सफेदपोश सहयोगियों की भूमिका की जाँच कर रही हैं। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ होने की संभावना जताई जा रही है।
आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस कार्रवाई को किश्तवाड़ जिले में आतंकी सपोर्ट सिस्टम को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में अहम सफलता बताया है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि आतंकवादियों को शरण देने, उनकी मदद करने, संसाधन उपलब्ध कराने या सुरक्षा बलों की जानकारी साझा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति जारी रहेगी।
संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपील
किश्तवाड़ पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।
पुलिस ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, देश-विरोधी गतिविधि या आतंकवाद से संबंधित जानकारी तुरंत सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा करें। समय पर प्राप्त सूचना के माध्यम से बड़ी आतंकी साजिशों को विफल किया जा सकता है।
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