बिहार की राजधानी पटना में बुधवार, 22 जुलाई को छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान भारी उपद्रव देखने को मिला। वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के बैनर तले निकाले गए मार्च में शामिल कुछ प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मियों, पत्रकारों और वाहनों को निशाना बनाने का आरोप है।
स्थिति बिगड़ने के बाद पटना पुलिस ने कोतवाली, गांधी मैदान और सचिवालय थाने में लगभग 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस ने 40 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
CCTV और वायरल वीडियो से होगी पहचान
पटना के SSP कार्तिकेय शर्मा के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों की पहचान CCTV फुटेज, पुलिस वीडियोग्राफी और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के आधार पर की जा रही है। पहचान पूरी होने के बाद आरोपितों के खिलाफ गिरफ्तारी और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस यह भी जाँच रही है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा अचानक भड़की या इसके पीछे पहले से कोई योजना तैयार की गई थी। साइबर सेल कुछ यूट्यूबरों और सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स की गतिविधियों की भी जाँच कर रही है।
कई इलाकों में पुलिस की छापेमारी
घटना के बाद पटना पुलिस की अलग-अलग टीमों ने गांधी मैदान, कदमकुआं, बहादुरपुर, बोरिंग रोड और बुद्धा कॉलोनी सहित कई इलाकों में छापेमारी की। पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल होने के संदेह में कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।
अधिकारियों का कहना है कि हिंसा, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
बैरिकेड उठाकर आगे बढ़ती रही भीड़
प्रदर्शन की शुरुआत गांधी मैदान के पास जेपी गोलंबर से हुई थी। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए, लेकिन प्रदर्शनकारी कथित तौर पर बैरिकेड उठाकर आगे बढ़ते रहे।
मार्च डाकबंगला चौराहा और बेली रोड से होते हुए मुख्यमंत्री आवास की दिशा में बढ़ा। करीब छह घंटे तक चले हंगामे के कारण राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
पुलिस और प्रशासनिक वाहनों में तोड़फोड़
आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान डाकबंगला चौराहे से बेली रोड तक कई स्थानों पर पथराव किया गया। पटना IG की एस्कॉर्ट गाड़ी, सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार के वाहन और कई पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की गई।
प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर भाजपा विधायक रोहित पांडे की गाड़ी पलटने की कोशिश की और उनके साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट की। भाजपा विधायक विनय बिहारी और पार्टी नेता अजय सिंह के वाहनों के शीशे भी तोड़े जाने का आरोप है।
पुलिसकर्मी और पत्रकार घायल
हिंसक प्रदर्शन के दौरान गांधी मैदान थाने के प्रभारी सहित कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है। पथराव में कुछ पत्रकारों को भी चोटें आईं और उनके उपकरणों को नुकसान पहुँचा।
हालात नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। स्थिति लगातार बिगड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज करते हुए प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाया और कई लोगों को हिरासत में लिया।
क्या थीं प्रदर्शनकारी छात्रों की माँगें?
प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। इसके साथ ही छात्रों ने कई शैक्षणिक मुद्दे भी उठाए:
पेपर लीक की घटनाओं पर रोक, शिक्षा के निजीकरण का विरोध, 7.5 CGPA की अनिवार्यता समाप्त करना, बढ़ी हुई फीस वापस लेना, नॉन-नेट फेलोशिप लागू करना और पटना विश्वविद्यालय की स्वायत्तता बनाए रखना उनकी प्रमुख माँगों में शामिल था।
हालाँकि, प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पथराव और तोड़फोड़ के कारण छात्रों की मूल माँगें पीछे छूट गईं और पूरा मामला कानून-व्यवस्था के विवाद में बदल गया।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज
घटना के बाद बिहार की राजनीति भी गरमा गई है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन की आड़ में पटना का माहौल खराब करने की कोशिश की गई। दूसरी ओर, प्रदर्शन से जुड़े संगठनों की ओर से पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उपलब्ध वीडियो और तकनीकी साक्ष्यों की निष्पक्ष जाँच के बाद ही जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
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