जंतर-मंतर पर जारी CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन को अब भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहन) का समर्थन मिलने की घोषणा के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। किसान संगठन ने ऐलान किया है कि उसके कार्यकर्ता 27 जुलाई को दिल्ली के लिए मार्च करेंगे और प्रदर्शनकारियों के साथ तब तक डटे रहेंगे, जब तक उनकी मांगों पर निर्णय नहीं हो जाता।
संगठन के अनुसार, उसके सैकड़ों कार्यकर्ता विभिन्न गांवों से खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान एकत्र करेंगे तथा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से दिल्ली पहुंचाकर प्रदर्शन स्थल तक पहुंचाएंगे। किसान यूनियन का कहना है कि यह कदम प्रदर्शनकारियों के समर्थन और उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उठाया जा रहा है।
Ab aayega aur maza!
The government must understand that it can either bomb the peaceful protesters using the tanks it is transporting to Delhi (I mean, what are they trying to do by transporting these? Kill their own children? Is this where we have come in Gandhi’s India?) Or,… https://t.co/nrFVjHN3mC
— Saurav Das (@SauravDassss) July 25, 2026
इस बीच CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने किसान संगठन के समर्थन का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उसे प्रदर्शनकारियों की मांगों पर विचार करना चाहिए। हालांकि, उनके कुछ बयानों को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। विशेष रूप से दिल्ली में कथित तौर पर टैंक लाए जाने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की आशंका संबंधी टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
उधर, आंदोलन को लेकर एक अन्य विवाद तब सामने आया जब खालिस्तान समर्थक संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) द्वारा CJP के समर्थन में कथित रूप से 10 लाख डॉलर की फंडिंग की घोषणा किए जाने के दावे चर्चा में आए। सोशल मीडिया पर प्रसारित पोस्टों में SFJ प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा आंदोलन के समर्थन की बात कही गई थी। इन दावों के बाद आंदोलन और उससे जुड़े संगठनों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
This is a direct screenshot of the fake news you had spread regarding the protest
And this is not the first example
Bad news for you, that I have archived all the links and taken screen recording, so it won't matter even if you have deleted it https://t.co/7bYc66hayK pic.twitter.com/8qDpiDGYep
— Muji Singh Rangi (@mujifren) July 24, 2026
विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहन) के आंदोलन में शामिल होने से 2020-21 के किसान आंदोलन की यादें फिर ताजा हो गई हैं। उस दौर में भी विभिन्न संगठनों और बाहरी तत्वों की कथित भूमिका को लेकर व्यापक बहस हुई थी। अब जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन में किसान संगठनों की एंट्री के बाद यह आंदोलन और अधिक राजनीतिक महत्व हासिल करता दिखाई दे रहा है।
फिलहाल सभी की नजरें 27 जुलाई को प्रस्तावित किसान मार्च और दिल्ली में होने वाली आगामी घटनाओं पर टिकी हुई हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
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