अलीगढ़ में जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और उत्तर प्रदेश पुलिस के बीच विवाद गहराता नजर आ रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर हुए प्रदर्शन के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सिविल लाइन थाने के थाना प्रभारी (SHO) सतवीर सिंह के हाथ में सर्विस पिस्तौल दिखाई दे रही है। वीडियो को लेकर सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने यूपी पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट से वीडियो साझा करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि विश्वविद्यालयों को हमेशा आक्रांताओं ने ही तोड़ा है और पुलिस अधिकारियों को अपनी शिक्षा का महत्व समझना चाहिए।
पिस्तौल निकालनेवाले ये भूल गये कि अगर उनकी पढ़ाई बीच में रुक जाती, तो ये पुलिस की नौकरी इनके हाथ न आती।
विश्वविद्यालय हमेशा आक्रांताओं ने तोड़े हैं, और कुछ नहीं कहना है।#जौहर_यूनिवर्सिटी_रामपुर_उप्र pic.twitter.com/QpbYbsa4vM
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 24, 2026
हालांकि, वायरल वीडियो का दूसरा पक्ष भी सामने आया है। आरोप लगाया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर साझा किया गया वीडियो अधूरा है और उसमें पूरी घटना नहीं दिखाई गई। पूरा वीडियो सामने आने के बाद घटनाक्रम की तस्वीर कुछ अलग नजर आती है।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के तस्वीर महल चौराहे पर सपा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान भारी हंगामा। पुलिस अधिकारी द्वारा पिस्टल निकालने पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण।#viralpost @myogiadityanath @rangealigarh @aligarhpolice @Dm_Aligarh pic.twitter.com/7EypVyiKkr
— Karan chauhan (Reporter) (@chauhan_ka20853) July 25, 2026
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने 15 जुलाई 2026 को रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। प्रशासन का दावा है कि इन इमारतों का निर्माण आवश्यक अनुमति के बिना किया गया था। इसी फैसले के विरोध में 24 जुलाई 2026 को अलीगढ़ कलेक्ट्रेट के बाहर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने सरकार और रामपुर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसी बीच कुछ प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाने की कोशिश की। पुलिस ने पुतला दहन रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
सामने आए विस्तृत वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस अधिकारियों को घेरकर नारेबाजी करते और धक्का देते दिखाई देते हैं। इसी दौरान SHO सतवीर सिंह भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास में अपनी सर्विस पिस्तौल निकालते नजर आते हैं। पुलिस का कहना है कि यह कदम भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए उठाया गया था।
घटना के बाद पुलिस ने कुछ नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने गोपाल नामक एक सपा कार्यकर्ता को गिरफ्तार भी किया है। मामले की जांच जारी है और प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था भंग करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक पक्ष इसे पुलिस की सख्ती बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अधूरी जानकारी के आधार पर निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कह रहा है।
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