महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने कांग्रेस नेता भाई जगताप के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से AI से तैयार किया गया फर्जी वीडियो शेयर करने के मामले में FIR दर्ज की है। वीडियो में दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस यानी DCP सुमित झा को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के बाद इस्तीफा देते हुए दिखाया गया था।
पुलिस और स्वतंत्र फैक्ट-चेक में सामने आया कि DCP सुमित झा ने इस्तीफा नहीं दिया था। वायरल वीडियो में एक पुराने वास्तविक वीडियो के साथ कथित रूप से AI से तैयार ऑडियो जोड़कर अधिकारी के इस्तीफे का झूठा दावा किया गया था। महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर वीडियो के निर्माण और प्रसार से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र साइबर पुलिस के नोडल थाने में FIR
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मामले में FIR संख्या 0063/2026 महाराष्ट्र साइबर पुलिस के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है। कांग्रेस नेता भाई जगताप के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 353(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
यह कार्रवाई भाजपा के सोशल मीडिया सह-संयोजक निखिल भामरे की शिकायत के आधार पर की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि फर्जी वीडियो शेयर किए जाने से आम लोगों के बीच भ्रम पैदा हुआ और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के बारे में गलत सूचना फैलाई गई।
@Bhaijagtap1 X हैंडल से शेयर हुआ था वीडियो
FIR से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, AI से बनाया गया कथित फर्जी वीडियो X हैंडल @Bhaijagtap1 से शेयर किया गया था। वीडियो को इस तरह प्रस्तुत किया गया था, मानो उसमें दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी DCP सुमित झा स्वयं अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर रहे हों।
वीडियो में अधिकारी के नाम से दावा किया गया था कि सरकार उन पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को लेकर झूठ बोलने और उन्हें अपराधी साबित करने का दबाव बना रही थी।
क्लिप में यह भी दिखाया गया था कि अधिकारी कथित तौर पर ऐसी व्यवस्था का हिस्सा बने रहने से इनकार कर रहे हैं, जो उन्हें सच बोलने से रोकती है और निर्दोष छात्रों को झूठे मामलों में फंसाने के लिए मजबूर करती है।
जांच और फैक्ट-चेक में यह कथित बयान फर्जी पाया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि DCP सुमित झा ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया और न ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर दावा किया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस के डीसीपी सुमित झा ने जंतर – मंतर आंदोलन के समर्थन में तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। #PIBFactCheck
❌ यह #AI जनरेटेड फर्जी वीडियो है।
▶️ वास्तविक वीडियो – https://t.co/GuIgY3gHOT
▶️ अधिक जानकारी… pic.twitter.com/hjk0B936yf
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) July 28, 2026
पुराने वीडियो में जोड़ा गया AI से तैयार ऑडियो
CyberPeace की फैक्ट-चेक रिपोर्ट के अनुसार, वायरल वीडियो पूरी तरह से नया तैयार किया गया दृश्य नहीं था। इसमें दिल्ली पुलिस द्वारा 23 जुलाई 2026 को जारी किए गए एक वास्तविक वीडियो का इस्तेमाल किया गया था।
उस वास्तविक वीडियो में कथित रूप से AI से तैयार किया गया ऑडियो जोड़ दिया गया। इसके बाद उसे इस दावे के साथ वायरल किया गया कि DCP सुमित झा ने छात्र प्रदर्शन पर सरकार और पुलिस की कार्रवाई से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया है।
फैक्ट-चेक में पाया गया कि वीडियो का दृश्य वास्तविक था, लेकिन उसमें सुनाई देने वाली इस्तीफे संबंधी आवाज और बयान मूल वीडियो का हिस्सा नहीं थे।
वीडियो कैसे बना और कहां-कहां फैला, इसकी जांच
महाराष्ट्र साइबर पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित AI वीडियो किसने तैयार किया, इसके लिए किन तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया गया और इसे पहली बार किस सोशल मीडिया अकाउंट से अपलोड किया गया।
जांच में वीडियो शेयर करने वाले खातों, उसकी पहुंच, रीपोस्ट, फॉरवर्डिंग पैटर्न और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा सकती है। पुलिस यह भी जांच रही है कि वीडियो शेयर करने के पीछे कोई सुनियोजित उद्देश्य था या इसे बिना सत्यापन के आगे बढ़ाया गया।
फिलहाल जांच जारी है और अदालत या जांच एजेंसी की ओर से मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
PIB फैक्ट चेक और दिल्ली पुलिस ने वीडियो को बताया फर्जी
FIR दर्ज होने से पहले ही वायरल वीडियो को लेकर आधिकारिक स्तर पर स्पष्टीकरण जारी किया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक PIB फैक्ट चेक यूनिट और दिल्ली पुलिस ने DCP सुमित झा के इस्तीफे का दावा करने वाले वीडियो को AI से तैयार और पूरी तरह फर्जी बताया था।
दोनों एजेंसियों ने लोगों से ऐसे भ्रामक वीडियो पर भरोसा नहीं करने की अपील की थी। साथ ही सलाह दी गई थी कि किसी अधिकारी, संस्था या संवेदनशील घटना से जुड़े वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर की जाए।
भाजपा ने भाई जगताप से मांगी सार्वजनिक माफी
इस मामले पर महाराष्ट्र भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने कांग्रेस नेता भाई जगताप पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। उन्होंने मांग की कि भाई जगताप वीडियो को तुरंत अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटाएं और महाराष्ट्र की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
नवनाथ बन ने कहा कि AI से तैयार फर्जी वीडियो बनाना या उसे बिना जांच के शेयर करना गंभीर मामला है। इससे समाज में भ्रम फैल सकता है और लोगों का सरकारी संस्थाओं तथा अधिकारियों पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद सामान्य हैं, लेकिन राजनीतिक विरोध के लिए फर्जी AI कंटेंट के इस्तेमाल को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मामले में जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की।
AI डीपफेक बना राजनीतिक दुष्प्रचार की नई चुनौती
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब राजनीतिक नेताओं, पुलिस अधिकारियों और सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के फर्जी वीडियो बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
AI की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरे के भाव और बोलने के तरीके की नकल कर ऐसा वीडियो तैयार किया जा सकता है, जिसे पहली नजर में वास्तविक समझना आसान होता है। विशेष रूप से विरोध-प्रदर्शन, चुनाव, हिंसा या सरकारी कार्रवाई से जुड़े मामलों में ऐसे वीडियो बड़े पैमाने पर गलत सूचना फैला सकते हैं।
इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की सत्यता जांचने और आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
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