कर्नाटक के बेल्थांगडी की अदालत का फैसला
कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले की बेल्थांगडी अदालत ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया यानी SDPI के राष्ट्रीय महासचिव रियाज फरंगीपेट को वर्ष 2015 के भड़काऊ भाषण मामले में दोषी ठहराया है। अदालत ने रियाज को छह महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाने के साथ उस पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
यह मामला जुलाई 2015 में बेल्थांगडी में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दिए गए भाषण से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, भाषण की भाषा ऐसी थी, जिससे दो समुदायों के बीच शत्रुता बढ़ने और क्षेत्र की शांति-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका थी। अदालत ने रियाज को भारतीय दंड संहिता की धारा 153A के तहत दोषी माना।
सजा के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मजिस्ट्रेट रामलिंगप्पा ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद सजा का आदेश सुनाया। फैसले के बाद रियाज फरंगीपेट को सजा काटने के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस ने इस मामले में अपराध संख्या 315/2015 दर्ज की थी। जांच पूरी होने के बाद आईपीसी की धारा 153A और 295A के तहत अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। हालांकि अदालत ने उसे धारा 153A के तहत दोषी ठहराकर सजा सुनाई है।
क्या था 2015 का मामला?
पुलिस के आरोपपत्र के अनुसार, जुलाई 2015 में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े एक विरोध प्रदर्शन के दौरान रियाज फरंगीपेट ने कथित रूप से विवादित भाषण दिया था।
अभियोजन पक्ष का कहना था कि भाषण में गाय के नाम पर मुसलमानों पर हमले जारी रहने की स्थिति में सार्वजनिक स्थान पर गोहत्या करने और गोमांस बेचने जैसी बातें कही गई थीं। आगामी बकरीद के अवसर पर बेल्थांगडी बस स्टैंड के सामने गोमांस बेचने और इसका विरोध करने वालों को जवाब देने की चेतावनी भी कथित रूप से दी गई थी।
पुलिस ने इन बयानों को धार्मिक भावनाएं भड़काने और दो समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने वाला माना था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर माना कि भाषण में सार्वजनिक शांति को प्रभावित करने की क्षमता थी।
कौन हैं रियाज फरंगीपेट?
रियाज फरंगीपेट कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ क्षेत्र में सक्रिय SDPI नेता हैं। पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट पर उन्हें वर्तमान में राष्ट्रीय महासचिव beziehungsweise राष्ट्रीय महासचिव—संगठन के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। जनवरी 2026 में हुए SDPI के राष्ट्रीय प्रतिनिधि परिषद कार्यक्रम में भी उन्हें राष्ट्रीय महासचिव चुने जाने की जानकारी दी गई थी।
रियाज ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव भी लड़ा है। चुनावी हलफनामे से संबंधित सार्वजनिक रिकॉर्ड में उनके खिलाफ बेल्थांगडी में धारा 153A से जुड़ा मामला दर्ज होने का उल्लेख मिलता है। हालांकि चुनावी हलफनामे पुराने समय की स्थिति बताते हैं और मामलों की नवीनतम न्यायिक स्थिति अलग हो सकती है।
2022 में NIA ने की थी आवास की तलाशी
सितंबर 2022 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मंगलुरु के बाहरी इलाके बीसी रोड स्थित रियाज फरंगीपेट के आवास की तलाशी ली थी। उस समय प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, तलाशी बिहार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक रैली में कथित व्यवधान की साजिश से जुड़े मामले के सिलसिले में की गई थी।
यह तलाशी किसी दोषसिद्धि के बराबर नहीं थी। रियाज ने उस समय आरोपों से इनकार करते हुए कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया था।
PFI पर पांच वर्षों का प्रतिबंध
केंद्र सरकार ने 27 सितंबर 2022 को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उससे जुड़े कई संगठनों को पांच वर्षों के लिए गैरकानूनी घोषित किया था। बाद में UAPA ट्रिब्यूनल से संबंधित सरकारी दस्तावेज में भी इस अधिसूचना और प्रतिबंध का उल्लेख किया गया।
SDPI स्वयं को एक स्वतंत्र राजनीतिक दल बताती है और उस पर PFI के साथ सांगठनिक संबंध होने के दावों का विरोध करती रही है। इसलिए दोनों संगठनों के संबंध को लेकर किसी दावे को आधिकारिक न्यायिक निष्कर्ष के बजाय राजनीतिक और जांच एजेंसियों के आरोपों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
अदालत ने दिया सामाजिक सौहार्द का संदेश
अदालत का यह फैसला सार्वजनिक भाषणों और राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों के दौरान जिम्मेदार भाषा के इस्तेमाल की आवश्यकता को रेखांकित करता है। धारा 153A का उद्देश्य धर्म, जाति, जन्मस्थान, भाषा या समुदाय के आधार पर अलग-अलग समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को दंडित करना है।
इस मामले में अदालत ने माना कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उपयोग ऐसी भाषा के लिए नहीं किया जा सकता, जिससे सांप्रदायिक तनाव या कानून-व्यवस्था का खतरा पैदा हो।
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