प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में दिए गए ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह एवं वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की प्रतिक्रिया के बाद बीजेपी नेताओं ने उन पर निशाना साधा है। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी चिदंबरम के बयान पर तीखा पलटवार करते हुए यूपीए सरकार के दौरान नक्सली हिंसा से जुड़े आंकड़ों का हवाला दिया है।
पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है। इसके बाद बीजेपी के कई नेताओं ने चिदंबरम को निशाने पर लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में कहा था कि हथियारबंद नक्सलवाद लगातार कमजोर हुआ है, लेकिन देश को वैचारिक स्तर पर सक्रिय ‘दिमागी नक्सलियों’ से भी सतर्क रहने की जरूरत है।
हर्ष संघवी बोले- चिदंबरम के बयान से हैरान नहीं
गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने पी. चिदंबरम की पोस्ट का जवाब देते हुए कहा कि वह कांग्रेस नेता की टिप्पणी से बिल्कुल हैरान नहीं हैं। संघवी ने इसके बाद यूपीए शासन के दौरान नक्सली हिंसा और सुरक्षाबलों की मौत से जुड़े कई आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन केंद्र सरकार की आंतरिक सुरक्षा नीति पर सवाल खड़े किए।
Shocked? Not at all.
Now we know why Naxalism prospered during P. Chidambaram’s tenure as Home Minister and under the UPA government.
Now we know why around 1913 policemen and CRPF jawans were killed fighting Naxalism during 2004–14.
Now we know why more than 5,019 Indians… https://t.co/8TiTzBlbLN
— Harsh Sanghavi (@sanghaviharsh) August 16, 2026
हर्ष संघवी ने दावा किया कि 2004 से 2014 के बीच नक्सलवाद के खिलाफ लड़ते हुए करीब 1,913 पुलिस और CRPF जवान मारे गए, जबकि नक्सली हिंसा में 5,019 से अधिक लोगों की जान गई। उन्होंने चिदंबरम के गृह मंत्री रहते हुए पुलिस शस्त्रागार से नक्सलियों द्वारा हथियार लूटे जाने और 2013 में बड़ी संख्या में जिलों के नक्सली हिंसा से प्रभावित होने का भी जिक्र किया। ये आंकड़े संघवी की राजनीतिक पोस्ट में किए गए दावे हैं।
केंद्र सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक रिपोर्ट में भी 2004 से 2014 के बीच वामपंथी उग्रवाद की गंभीरता का उल्लेख किया गया है। PIB के अनुसार इस अवधि में नक्सली हिंसा की 16,463 घटनाएं दर्ज हुईं और सुरक्षाबलों के 1,851 जवानों की मौत हुई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बाद के दशक में नक्सली हिंसा और सुरक्षाबलों की मौतों में उल्लेखनीय कमी आई।
‘अब हमें पता है नक्सलवाद क्यों फला-फूला’
हर्ष संघवी ने चिदंबरम पर हमला बोलते हुए उनकी टिप्पणी को यूपीए सरकार के नक्सलवाद से निपटने के रिकॉर्ड से जोड़ा। संघवी ने अपनी पोस्ट में कहा कि चिदंबरम के बयान के बाद यह समझ में आता है कि उनके गृह मंत्री रहने और यूपीए शासन के दौरान नक्सलवाद क्यों बढ़ा।
संघवी ने कहा कि यूपीए सरकार का आंतरिक सुरक्षा रिकॉर्ड स्वयं उसकी नीति के बारे में बहुत कुछ बताता है। हालांकि उनके कुछ आंकड़े उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए राजनीतिक दावे हैं और आधिकारिक सरकारी आंकड़ों में संबंधित अवधियों या श्रेणियों के आधार पर संख्या अलग हो सकती है।
चिदंबरम के बयान पर BJP के कई नेताओं ने साधा निशाना
यह विवाद केवल हर्ष संघवी तक सीमित नहीं रहा। बीजेपी के कई नेताओं ने पी. चिदंबरम के बयान पर सवाल उठाए हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी चिदंबरम पर हमला करते हुए उनके गृह मंत्री के कार्यकाल और उस समय नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पुराने बयान का उल्लेख करते हुए नक्सलवाद को गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया।
इस तरह ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस अब यूपीए और एनडीए सरकारों के नक्सलवाद विरोधी रिकॉर्ड की तुलना तक पहुंच गई है।
हर्ष संघवी के जवाब की क्यों हो रही चर्चा?
हर्ष संघवी फिलहाल गुजरात के उपमुख्यमंत्री हैं। गुजरात सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें डिप्टी चीफ मिनिस्टर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। उन्होंने 17 अक्टूबर 2025 को गुजरात में बड़े मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
हर्ष संघवी का जन्म 8 जनवरी 1985 को हुआ था, इसलिए अगस्त 2026 में उनकी उम्र 41 वर्ष है। वहीं पी. चिदंबरम का जन्म 16 सितंबर 1945 को हुआ था और वह फिलहाल 80 वर्ष के हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच उम्र का अंतर भी सोशल मीडिया पर इस राजनीतिक बयानबाजी की चर्चा का एक पहलू बना हुआ है।
हालांकि संघवी को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने को किसी एक केंद्रीय नेता से उनकी निकटता या बिहार चुनाव से जोड़ना आधिकारिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं है। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी इतना पुष्टि करती है कि अक्टूबर 2025 के गुजरात मंत्रिमंडल फेरबदल में उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया था।
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