भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने विदेश नीति और तेजी से बदलते वैश्विक हालात को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत किसी अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने के बजाय सोच-समझकर फैसले करता है, ताकि देश के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को बेहतर तरीके से साधा जा सके। जयशंकर ने वैश्विक संघर्षों, टैरिफ, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन और विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी भारत की रणनीति का जिक्र किया।
विदेश मंत्री का कहना है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां पहले के मुकाबले कहीं अधिक जटिल हो चुकी हैं। भारत के हित भी अब व्यापक हैं और दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ उसकी साझेदारी बढ़ी है। ऐसे में किसी एक घटनाक्रम पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय अलग-अलग हितों और दीर्घकालिक परिणामों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाना जरूरी है।
‘जल्दबाजी के बजाय सोच-समझकर किए गए फैसलों से मिला फायदा’
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने के बजाय सोच-विचार के बाद लिए गए फैसलों ने भारत के रणनीतिक हितों को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद की है। उनका जोर इस बात पर रहा कि विदेश नीति में फैसलों का आकलन तत्काल राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से नहीं, बल्कि देश को मिलने वाले दीर्घकालिक लाभ के आधार पर किया जाना चाहिए।
दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ भारत के रिश्तों का दायरा बढ़ने के कारण किसी भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर संतुलित दृष्टिकोण की अहमियत भी बढ़ गई है।
ICWA की 25वीं सालगिरह पर जयशंकर का संबोधन
एस जयशंकर ने इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) की 25वीं सालगिरह के अवसर पर अपने संबोधन में बदलते वैश्विक माहौल पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे जटिल अंतरराष्ट्रीय वातावरण में काम कर रहा है जहां लगातार बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना आवश्यक है।
जयशंकर ने वैश्विक व्यापार में टैरिफ के उतार-चढ़ाव और विभिन्न बाजारों में बढ़ती डंपिंग जैसी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी परिस्थितियों का सबसे प्रभावी ढंग से मुकाबला कैसे किया जाए।
उनके मुताबिक भारत के हित पहले से बड़े हैं, दुनिया के साथ उसका जुड़ाव बढ़ा है और उसके साझेदारों की संख्या भी ज्यादा हुई है। इसलिए बदलती परिस्थितियों में रणनीतियों और प्रतिक्रियाओं को लगातार बेहतर बनाना जरूरी है।
My remarks at the inaugural session of Silver Jubilee Celebration of Indian Council of World Affairs as an Institution of National Importance.
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— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 15, 2026
वैश्विक संघर्षों के बीच भारत के सामने संतुलन की चुनौती
विदेश मंत्री ने मौजूदा वैश्विक संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के लिए अलग-अलग हितों के बीच संतुलन बनाना बेहद महत्वपूर्ण है। भारत के कई ऐसे देशों के साथ अच्छे संबंध हैं जो अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय विवादों और संघर्षों में विभिन्न पक्षों से जुड़े हुए हैं।
जयशंकर के मुताबिक ऐसी परिस्थितियों में किसी एक तय तरीके या रुख को अपनाना आसान नहीं होता। भारत को अपने राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक आवश्यकताओं और रणनीतिक साझेदारियों समेत कई पहलुओं पर विचार करना पड़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में विभिन्न आर्थिक साधनों का रणनीतिक या दबाव बनाने वाले हथियार के रूप में इस्तेमाल बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में भारत के लिए अपनी आर्थिक और कूटनीतिक क्षमता को मजबूत रखना जरूरी है।
ऊर्जा सुरक्षा में भारत की रणनीति रही अहम
जयशंकर ने ऊर्जा सुरक्षा को भारत की विदेश नीति और आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की नीति ने भारत को सप्लाई बनाए रखने और लागत को नियंत्रित रखने में मदद की है।
ऊर्जा आयात पर बड़ी निर्भरता रखने वाली अर्थव्यवस्था के लिए आपूर्ति के स्रोतों में विविधता महत्वपूर्ण होती है। बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच भारत ने अलग-अलग साझेदारों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया है।
नए बाजार और पार्टनर से एक्सपोर्ट को मिला सहारा
विदेश मंत्री के अनुसार नए साझेदारों, नए बाजारों और नए व्यापारिक रास्तों ने भारतीय निर्यात को सुरक्षित रखने और उसे बढ़ाने में भी मदद की है। बदलते अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक माहौल में भारत ने अपने आर्थिक संबंधों का विस्तार करने पर जोर दिया है।
उन्होंने सप्लाई चेन का भी जिक्र करते हुए कहा कि तेजी से अपनाए गए स्मार्ट समाधानों ने भारत को वैश्विक स्तर पर पैदा हुई बाधाओं से निपटने में मदद की है। सप्लाई चेन की मजबूती अब आर्थिक सुरक्षा के साथ राष्ट्रीय रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
विदेशों में भारतीय समुदाय की सुरक्षा पर जयशंकर का बयान
एस जयशंकर ने विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा को भी सरकार की विदेश नीति की उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि सही नीतियों और रणनीतिक फैसलों की वजह से उथल-पुथल भरे वैश्विक माहौल में विदेशों में भारतीय समुदाय काफी हद तक सुरक्षित रहा है।
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा तथा जरूरत पड़ने पर उनकी सहायता भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण पहलू बन गई है।
भारत के हित अब ग्लोबल: जयशंकर
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत आज कई देशों और क्षेत्रों के साथ पहले के मुकाबले कहीं बड़े स्तर पर जुड़ रहा है। भारत के हित अब वैश्विक हो चुके हैं, उसकी जिम्मेदारियां बढ़ी हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उससे अपेक्षाएं भी उसी अनुपात में बढ़ी हैं।
भारत वैश्विक चुनौतियों को लेकर अपने विचार पहले के मुकाबले अधिक आत्मविश्वास के साथ सामने रख रहा है। इसमें विकासशील देशों और ‘ग्लोबल साउथ’ से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
‘भारत की बौद्धिक भागीदारी भी बढ़नी चाहिए’
जयशंकर ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के साथ अंतरराष्ट्रीय मामलों में देश की बौद्धिक भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे भारत का वैश्विक प्रभाव और जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं, विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर देश के भीतर गंभीर चर्चा और विश्लेषण का स्तर भी उसी गति से बढ़ना चाहिए।
उनका कहना था कि निरंतर बहस और बातचीत बेहतर रणनीतियां तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। तेजी से बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत के लिए ऐसी नीति जरूरी है जो तत्काल चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की भी रक्षा कर सके।
बदलती दुनिया में भारत की रणनीति पर जयशंकर का संदेश
जयशंकर के संबोधन का मुख्य संदेश यह रहा कि आज की विदेश नीति केवल किसी एक देश या संकट पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रह सकती। ऊर्जा, व्यापार, टैरिफ, सप्लाई चेन, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा और भू-राजनीतिक संघर्ष एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
ऐसे माहौल में भारत की रणनीति अलग-अलग देशों के साथ अपने संबंध बनाए रखने, राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और परिस्थितियों के अनुसार नीतियों में बदलाव करने पर केंद्रित है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने के बजाय सोच-समझकर उठाए गए कदम भारत के रणनीतिक हितों के लिए ज्यादा प्रभावी साबित हुए हैं।
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