बिहार के गया जी में चल रहे पितृपक्ष मेला-2026 में देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु अपने पितरों के मोक्ष की कामना लेकर पहुंच रहे हैं। पितृपक्ष के सातवें दिन विदेशी श्रद्धालुओं के एक जत्थे ने फल्गु नदी के तट पर सनातन परंपरा और वैदिक विधि-विधान के साथ पिंडदान और तर्पण किया।
शुक्रवार सुबह गया जी रबर डैम के पास संगत घाट पर 19 विदेशी श्रद्धालुओं ने अपने माता-पिता, पूर्वजों और अन्य दिवंगत प्रियजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। इनमें कुछ श्रद्धालु ऐसे भी थे जिन्होंने अपने दिवंगत पुत्र और सहेली के मोक्ष की कामना के साथ श्राद्ध कर्म किया।
विदेशी श्रद्धालुओं का यह समूह जर्मनी, रूस, इटली और अफ्रीकी देशों समेत अलग-अलग स्थानों से गया जी पहुंचा है। आचार्य लोकनाथ गौड़ के सानिध्य में सभी ने करीब तीन घंटे तक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।
फल्गु तट पर विदेशी श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान
पितृपक्ष के सातवें दिन सुबह से ही गया जी में श्रद्धालुओं की गतिविधियां शुरू हो गई थीं। तेज धूप और उमस के बावजूद विदेशी श्रद्धालुओं ने गया जी रबर डैम के पास फल्गु नदी के किनारे धार्मिक अनुष्ठान पूरे किए।
जत्थे में शामिल पुरुष श्रद्धालु ने धोती पहनी थी, जबकि 18 महिला श्रद्धालु भारतीय परंपरा के अनुसार साड़ी पहनकर पिंडदान में शामिल हुईं। मंत्रोच्चार के बीच फल्गु तर्पण किया गया और इसके बाद संगत घाट पर श्राद्ध कर्म संपन्न हुआ। आचार्य लोकनाथ गौड़ ने विधि-विधान से गयाश्राद्ध कराया। पूरा धार्मिक अनुष्ठान करीब तीन घंटे तक चला।
#WATCH | Gaya, Bihar: Foreign devotees from Germany, Ghana, Ukraine and Russia perform Pind Daan rituals for ancestors. pic.twitter.com/i4xcvzMCN6
— ANI (@ANI) October 2, 2026
विष्णुपद मंदिर में श्री विष्णुचरण पर अर्पित किए पिंड
फल्गु नदी के तट पर तर्पण और श्राद्ध कर्म पूरा करने के बाद श्रद्धालु गया जी के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर पहुंचे। यहां मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु के चरणचिह्न यानी श्री विष्णुचरण पर पिंड अर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने अपने माता-पिता, पूर्वजों और दिवंगत प्रियजनों की आत्मा की शांति तथा मोक्ष की कामना की।
सनातन परंपरा में गया जी को पितरों के लिए पिंडदान और श्राद्ध करने वाले प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है। यही कारण है कि पितृपक्ष के दौरान देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
गया जी पहुंचे 48 विदेशी श्रद्धालु
आचार्य लोकनाथ गौड़ के अनुसार इस बार 48 विदेशी श्रद्धालुओं का समूह पिंडदान के लिए गया जी आया है। इनमें से पहले समूह के 19 श्रद्धालुओं ने शुक्रवार को श्राद्ध कर्म संपन्न किया।
इस समूह में जर्मनी, रूस, इटली और अफ्रीका समेत विभिन्न देशों से आए श्रद्धालु शामिल हैं। समूह में केवल एक पुरुष श्रद्धालु है, जो जर्मनी में बैंककर्मी बताया गया है, जबकि बाकी महिला श्रद्धालु हैं। अन्य विदेशी श्रद्धालु शनिवार और रविवार को अपने पूर्वजों तथा दिवंगत परिजनों के लिए पिंडदान और गयाश्राद्ध करेंगे।
रूस और जर्मनी से भी बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
विदेशी पिंडदानियों में रूस से ब्रिनेवा, दुरसुनोवा, रेडियोलगा, पावलोवा, बुरीवा ओकसाना, गिमडिनोवा और सिफ्टेसिफायना शामिल बताई गई हैं। जर्मनी से भी कई श्रद्धालु पिंडदान के लिए गया जी पहुंचे। इसके अलावा इटली और घाना समेत अन्य देशों से आए श्रद्धालुओं ने भी श्राद्ध कर्म किया।
विदेशी श्रद्धालुओं ने भारतीय परंपरा के अनुसार वस्त्र धारण किए और मंत्रोच्चार के बीच पिंडदान, तर्पण तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया।
किसी ने बेटे तो किसी ने सहेली के लिए किया पिंडदान
विदेशी श्रद्धालुओं के पिंडदान के पीछे कई भावुक कहानियां भी सामने आईं। आचार्य के मुताबिक स्पेन की एक श्रद्धालु मरीना ने अपने दिवंगत पुत्र की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। बताया गया कि उनके बेटे की कैंसर से मृत्यु हो गई थी।
वहीं इटली से आई एक महिला श्रद्धालु ने अपनी दिवंगत सहेली के लिए गयाश्राद्ध किया और उसकी आत्मा की शांति तथा मोक्ष की कामना की। अन्य श्रद्धालुओं ने अपने माता-पिता और पूर्वजों के लिए पिंडदान किया।
विदेशी श्रद्धालुओं ने अपनाई सनातन परंपरा
आचार्य लोकनाथ गौड़ के मुताबिक इस समूह में शामिल विदेशी श्रद्धालु सनातन परंपरा से जुड़े हुए हैं और इसी आस्था के कारण वे गया जी में पिंडदान करने पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि वे रूस और दक्षिण अफ्रीका समेत विभिन्न स्थानों पर सनातन परंपराओं के बारे में लोगों को बताते हैं और हर साल विदेश से श्रद्धालुओं को गयाश्राद्ध के लिए लेकर आते हैं।
इस बार भी कुल 48 विदेशी श्रद्धालुओं का समूह गया जी पहुंचा है। शुक्रवार को 19 लोगों ने पिंडदान किया, जबकि शेष श्रद्धालु शनिवार और रविवार को धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करेंगे।
पितृपक्ष में क्यों खास है गया जी में पिंडदान?
सनातन धार्मिक मान्यताओं में गया जी का पिंडदान के लिए विशेष महत्व है। मान्यता है कि यहां फल्गु नदी के तट और विष्णुपद मंदिर में विधि-विधान से श्राद्ध एवं पिंडदान करने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इसी धार्मिक आस्था के कारण हर साल पितृपक्ष के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया जी पहुंचते हैं। अब विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी भी पितृपक्ष मेले में लगातार ध्यान आकर्षित कर रही है। इस बार जर्मनी, रूस, इटली, स्पेन और अफ्रीकी देशों से आए श्रद्धालुओं द्वारा भारतीय परंपरा के अनुसार पिंडदान करना पितृपक्ष मेला-2026 के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो गया है।
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