ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिकी वायुसेना ने ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस पर तैनात अपने B-1 बॉम्बर विमानों को वापस अमेरिका भेज दिया है। यह फैसला RAF Fairford के पास एक संदिग्ध आतंकी साजिश की जांच के बाद सामने आया है। यह वही रणनीतिक एयरबेस है जिसका इस्तेमाल हाल के अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए किया गया था।
पेंटागन के एक अधिकारी के मुताबिक, ब्रिटेन में तैनात अमेरिकी बॉम्बर अपने घरेलू ठिकानों पर लौट गए हैं। अमेरिकी बॉम्बर्स की यह वापसी ऐसे समय हुई है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव बना हुआ है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लेकर आगे के सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
RAF Fairford से वापस लौटे B-1 बॉम्बर
RAF Fairford अमेरिका के लिए यूरोप में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना है। यह अमेरिकी वायुसेना के उन चुनिंदा यूरोपीय एयरफील्ड्स में शामिल है, जहां B-1 और B-52 जैसे भारी रणनीतिक बॉम्बर ऑपरेट किए जा सकते हैं।
एविएशन और सैन्य विमानों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले समूहों के मुताबिक, ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद RAF Fairford से कई B-1 और B-52 बॉम्बर संचालित होते देखे गए थे। रविवार को भी कई B-1 बॉम्बर्स को RAF Fairford से उड़ान भरते देखा गया। इसके बाद पेंटागन अधिकारी ने उनके अमेरिका स्थित होम बेस पर लौटने की जानकारी दी।
ईरान के खिलाफ ऑपरेशन में इस्तेमाल हुआ RAF Fairford
RAF Fairford की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि हाल के संघर्ष में इस बेस का इस्तेमाल ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों में किया गया था।
ब्रिटेन ने अमेरिका को कुछ सीमित परिस्थितियों में इस एयरबेस का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। रणनीतिक बॉम्बर विमानों की लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता के कारण RAF Fairford मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए महत्वपूर्ण ठिकाना रहा है।
हालांकि अमेरिकी बॉम्बर इस बेस पर स्थायी रूप से तैनात नहीं रहते और आवश्यकता के अनुसार यहां उनकी तैनाती की जाती है।
संदिग्ध आतंकी साजिश के बाद बढ़ी सुरक्षा चिंता
अमेरिकी बॉम्बर्स की वापसी RAF Fairford के पास हुई एक संदिग्ध सुरक्षा घटना के बाद हुई है। सितंबर के आखिर में एयरबेस के आसपास संदिग्ध गतिविधियों के सिलसिले में ब्रिटिश पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया था।
इसके बाद सेंट्रल लंदन में एक ब्रिटिश-ईरानी दोहरी नागरिकता वाले व्यक्ति को भी कथित आतंकी गतिविधि की तैयारी के संदेह में गिरफ्तार किया गया। मामले में कुल छह लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में सभी को जमानत पर रिहा कर दिया गया, जबकि जांच जारी है।
क्या संदिग्ध साजिश के पीछे ईरान का हाथ?
ब्रिटिश अधिकारियों ने इस घटना के संभावित ईरान कनेक्शन की जांच की है। हालांकि अभी यह अंतिम रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि संदिग्ध घटना के पीछे ईरानी सरकार की भूमिका थी।
तेहरान ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है और आरोपों को खारिज किया है।
इससे पहले ईरान यह चेतावनी दे चुका है कि उसके क्षेत्र पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विदेशी सैन्य ठिकानों को वह संभावित सैन्य लक्ष्य मान सकता है। इसी वजह से RAF Fairford की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
ब्रिटेन में ईरान समर्थित नेटवर्क को लेकर पहले भी चेतावनी
ब्रिटिश अधिकारियों ने इससे पहले भी देश में कथित ईरान समर्थित नेटवर्क और प्रॉक्सी गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है।
अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से जुड़े तत्वों पर ब्रिटेन और दूसरे देशों में विभिन्न हिंसक साजिशों और आगजनी जैसी घटनाओं में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। कुछ मामलों में यहूदी समुदाय से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की कथित योजनाओं की भी जांच हुई है।
ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों ने पहले चेतावनी दी थी कि मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने की स्थिति में ब्रिटेन में ईरान से जुड़े संभावित खतरों का दायरा बढ़ सकता है।
ट्रंप बोले- ईरान पर लेने हैं कुछ फैसले
अमेरिकी बॉम्बर्स की वापसी ऐसे समय हुई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।
ट्रंप ने शनिवार को कहा कि उन्हें ईरान को लेकर कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेने हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान को सैन्य रूप से भारी नुकसान पहुंचाया गया है और अब आगे की कार्रवाई को लेकर विकल्प खुले हैं। इस बयान के बाद इस बात पर भी नजर है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले करता है या तनाव कम करने के लिए दूसरा रास्ता अपनाता है।
B-1 बॉम्बर क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
B-1B Lancer अमेरिकी वायुसेना का लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम रणनीतिक बॉम्बर है। इसकी लंबी रेंज और भारी मात्रा में हथियार ले जाने की क्षमता इसे अमेरिका के महत्वपूर्ण स्ट्राइक एयरक्राफ्ट में शामिल करती है।
RAF Fairford जैसे यूरोपीय ठिकानों पर इन विमानों की मौजूदगी अमेरिका को मध्य पूर्व सहित कई क्षेत्रों में अपेक्षाकृत तेजी से सैन्य कार्रवाई करने का विकल्प देती है।
ऐसे में ब्रिटेन से इन विमानों की वापसी को अमेरिका की रणनीतिक सैन्य तैनाती के संदर्भ में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी बॉम्बर फोर्स जरूरत पड़ने पर दुनिया के किसी भी हिस्से में कार्रवाई करने की क्षमता रखती है।
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच फैसले पर नजर
RAF Fairford से B-1 बॉम्बर्स की वापसी को लेकर सुरक्षा चिंताओं और सामान्य सैन्य तैनाती चक्र—दोनों पहलुओं पर चर्चा हो रही है। संदिग्ध आतंकी साजिश की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और ईरान ने इसमें अपनी भूमिका से साफ इनकार किया है।
अब नजर ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों की जांच और अमेरिका की अगली सैन्य रणनीति पर है। खासकर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि B-1 बॉम्बर्स को अमेरिका में ही रखा जाता है या भविष्य में उन्हें मध्य पूर्व के नजदीक किसी दूसरे सैन्य ठिकाने पर तैनात किया जाता है।
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