राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की परंपराओं, सामाजिक जिम्मेदारी और जनकल्याण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। बुधवार को नागपुर जिले के देओलापुर स्थित ‘गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र’ में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि भारत के लोगों को अपनी परंपराओं के अनुसार जीवन जीते हुए समाज और दुनिया की बेहतरी के लिए योगदान देना चाहिए।
मोहन भागवत ने कहा कि भारत की परंपराएं समाज और दुनिया की सुरक्षा एवं कल्याण सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने सामाजिक कार्यों में ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी की जरूरत पर भी जोर दिया। यह कार्यक्रम विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित किया गया था।
‘भारत की परंपराओं के अनुसार जीवन जिएं’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि लोगों को अपनी परंपराओं से जुड़े रहते हुए व्यक्तिगत जीवन के साथ समाज के कल्याण के लिए भी काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन, समाज और धर्म की सुरक्षा के साथ दुनिया की बेहतरी के लिए भारत के लोगों का अपनी परंपराओं के अनुसार जीवन जीना महत्वपूर्ण होता जा रहा है। भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक व्यक्ति का जीवन संतोषजनक होना चाहिए और इसे सुनिश्चित करने के लिए समाज के सभी लोगों को अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना चाहिए।
समाज के लिए कुछ न कुछ करने का दिया संदेश
RSS प्रमुख ने कहा कि केवल अपने और अपने परिवार के लिए काम करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को सामाजिक जिम्मेदारियों में भी भागीदारी करनी चाहिए। उन्होंने समाज के कल्याण के लिए किए जाने वाले कार्यों में आम लोगों की अधिक भागीदारी की जरूरत बताई।
भागवत के मुताबिक समाज के आकार की तुलना में अच्छे और सामाजिक कार्यों में सक्रिय लोगों की संख्या अभी पर्याप्त नहीं है। उन्होंने लोगों से अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के साथ समाज के लिए भी समय और प्रयास देने का आह्वान किया।
‘अच्छे काम किसी और के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते’
मोहन भागवत ने कहा कि कई लोग जानते हैं कि समाज के लिए क्या करने की आवश्यकता है, लेकिन अक्सर यह उम्मीद करते हैं कि यह जिम्मेदारी कोई दूसरा व्यक्ति निभाएगा।
उन्होंने कहा कि लोग नौकरी और परिवार की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए समाज के लिए अच्छे कार्य करने की अपेक्षा किसी और से रखते हैं। भागवत ने इसी सोच को बदलने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि जब समाज में कोई अच्छा बदलाव आता है तो उसमें पूरे समाज के योगदान की भूमिका होती है।
त्याग और सहनशीलता से दूसरों को मिलती है प्रेरणा
RSS प्रमुख ने त्याग और सहनशीलता को भी सामाजिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अपने निजी जीवन में त्याग और सहनशीलता दिखाने वाले लोग दूसरों को कठिन रास्ते चुनने तथा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
भागवत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति समाज के लिए बहुत कुछ देता है तो उसे बदले में भी बहुत कुछ मिलता है। उनके मुताबिक सामाजिक कार्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे दूसरे लोग भी प्रेरित होते हैं और समाज में सकारात्मक भागीदारी बढ़ती है।
मोरोपंत पिंगले और अशोक सिंघल का दिया उदाहरण
मोहन भागवत ने अपने संबोधन के दौरान दिवंगत RSS प्रचारक मोरोपंत पिंगले और विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल का उदाहरण भी दिया। उन्होंने दोनों नेताओं के जीवन को बड़े सामाजिक उद्देश्य के प्रति समर्पण से जोड़ा।
भागवत ने कहा कि दोनों ने निजी लाभ को प्राथमिकता देने के बजाय सामाजिक कार्यों के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने उनके उदाहरण के जरिए कहा कि सामाजिक कार्यों और बड़े उद्देश्यों के लिए किए गए त्याग को लंबे समय तक याद किया जाता है।
‘अच्छे काम करना ही सच्ची श्रद्धांजलि’
RSS प्रमुख ने कहा कि अच्छे लोगों को याद करने का अर्थ केवल उनके बारे में बात करना नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक उनके अच्छे कार्यों और विचारों को आगे बढ़ाना भी उन्हें याद करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब भी कोई अच्छा काम आगे बढ़ता है तो उन लोगों को भी याद किया जाता है जिन्होंने अतीत में ऐसे प्रयासों की शुरुआत की थी। भागवत ने इसे उनके समर्पण के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष पर कार्यक्रम
नागपुर जिले के देओलापुर स्थित गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र में आयोजित कार्यक्रम अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष से जुड़ा था। मोहन भागवत ने यहां कई पहलों का उद्घाटन किया और उपस्थित लोगों को संबोधित किया।
अशोक सिंघल लंबे समय तक विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहे थे और राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उनके जन्म शताब्दी वर्ष को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 27 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भी जन्म शताब्दी वर्ष का उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
समाज की भागीदारी बढ़ाने पर मोहन भागवत का जोर
मोहन भागवत के संबोधन का मुख्य फोकस समाज के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी और भारतीय परंपराओं पर रहा। उन्होंने लोगों से केवल अच्छे कार्य करने वालों को याद करने के बजाय स्वयं भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।
भागवत ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव तभी व्यापक हो सकता है जब ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के साथ सामाजिक कल्याण के लिए भी योगदान दें। उन्होंने अशोक सिंघल और मोरोपंत पिंगले के जीवन का उल्लेख करते हुए सेवा, त्याग और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
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