मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने विपक्षी दलों के विरोध पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि SIR को लेकर जो शोर सुनाई दे रहा है, वह आम मतदाताओं की तरफ से नहीं बल्कि उन राजनीतिक दलों की तरफ से है जो चुनाव नहीं जीत सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी योग्य मतदाता का नाम सूची से गलत तरीके से हटाया गया है तो उसके पास चुनाव आयोग के सामने शिकायत और नाम जुड़वाने का रास्ता मौजूद है।
जस्टिस ढींगरा का बयान ऐसे समय आया है जब SIR के खिलाफ विपक्षी दलों और कुछ नागरिक संगठनों का विरोध तेज है। 6 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में चुनाव आयोग की ओर मार्च किया था और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत SIR से जुड़ी कई मांगें उठाई थीं।
‘यह शोर मतदाता नहीं, चुनाव हारने वाली पार्टियां कर रही हैं’
पूर्व जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने SIR के खिलाफ हो रहे विरोध को लेकर कहा कि अगर आम मतदाताओं को इस प्रक्रिया से वास्तव में समस्या है तो उनके लिए अपनी शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था मौजूद है।
उन्होंने विपक्ष के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा शोर मतदाताओं की तुलना में चुनाव हारने वाली राजनीतिक पार्टियों की तरफ से ज्यादा किया जा रहा है। ढींगरा ने SIR को पूरी तरह रोकने की मांग के औचित्य पर भी सवाल उठाया।
#WATCH | Delhi | On opposition protesting against the SIR exercise, Former Judge of the Delhi High Court, Justice Shiv Narayan Dhingra, says, "This entire noise is not being made by voters. It is being made by those political parties that could not win the election. If the voter… pic.twitter.com/GFkCnM14Jh
— ANI (@ANI) October 7, 2026
‘वोटर को शिकायत है तो समाधान का रास्ता मौजूद’
जस्टिस ढींगरा के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं है या उसका नाम गलत तरीके से हटा दिया गया है, तो वह चुनाव आयोग के समक्ष अपनी शिकायत रख सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के समाधान के लिए पहले से प्रक्रिया मौजूद है।
चुनाव आयोग भी कह चुका है कि मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है। जिन योग्य नागरिकों का नाम सूची में नहीं है या हट गया है, वे दोबारा नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने SIR पूरा हो चुके राज्यों में छूटे हुए और पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश भी दिया है।
‘SIR रोकने की मांग का आखिर मकसद क्या?’
पूर्व जज ने SIR को रोकने की मांग पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया की निंदा करने या उसे नहीं होने देने की मांग से आयोग के काम पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की समीक्षा जरूरी है, ताकि मृत मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें, नए योग्य मतदाताओं को जोड़ा जा सके और सूची में मौजूद गलत या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान की जा सके।
मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने पर जोर
जस्टिस ढींगरा ने मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह जांचना जरूरी है कि सूची में मृत लोगों के नाम तो नहीं हैं और नए योग्य मतदाताओं के नाम सही तरीके से शामिल किए गए हैं या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि मतदान का अधिकार नहीं रखने वाले व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए।
SIR के तहत चुनाव आयोग भी मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं जैसी श्रेणियों में मतदाता सूची की जांच करने की बात कहता रहा है। दूसरी ओर, आलोचकों ने इस प्रक्रिया में वास्तविक और योग्य मतदाताओं के नाम छूटने को लेकर चिंता जताई है।
विपक्ष क्यों कर रहा SIR का विरोध?
SIR पिछले कुछ समय से बड़े राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटे हैं और इससे मतदान के अधिकार से वंचित होने का खतरा पैदा हुआ है। विपक्ष ने प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग भी की है।
6 अक्टूबर को कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में SIR को वापस लेना, कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल था।
चुनाव आयोग का क्या है रुख?
चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची को शुद्ध और अपडेट करने की प्रक्रिया बताता रहा है। आयोग का कहना है कि मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं जैसी प्रविष्टियों की पहचान के साथ पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करना इसका उद्देश्य है। आयोग ने विपक्ष की ओर से लगाए गए गड़बड़ी के आरोपों से भी इनकार किया है।
साथ ही, जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है वहां चुनाव आयोग ने छूटे हुए योग्य मतदाताओं और पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं को शामिल करने के लिए विशेष अभियान का निर्देश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति का नाम हट जाने पर भी वह पात्र होने की स्थिति में मतदाता सूची में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकता है।
SIR पर राजनीतिक टकराव के बीच आया ढींगरा का बयान
जस्टिस एसएन ढींगरा का बयान ऐसे समय सामने आया है जब SIR का मुद्दा चुनावी और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा में है। विपक्ष जहां मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की कवायद बता रहा है।
इसी विवाद के बीच पूर्व जस्टिस ढींगरा ने विपक्षी दलों के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा है कि किसी व्यक्तिगत मतदाता की शिकायत का समाधान उपलब्ध प्रक्रिया के जरिए किया जा सकता है और इसी आधार पर पूरी SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग उचित नहीं है।
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