आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास, बलिदान और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। गुजरात के नर्मदा जिले में जनजाति कल्याण आश्रम गुजरात की ओर से जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार से मानगढ़ धाम को तत्काल राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग की गई है। इस अभियान के तहत 22 अक्टूबर 2026 को गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली के कुल 60 जिलों में ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। संगठन ने मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने, गोविंद गुरु के योगदान को संरक्षित करने और आदिवासी समाज के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नर्मदा जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग
गुजरात के नर्मदा जिले में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को जनजाति कल्याण आश्रम गुजरात के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आदिवासी समाज की आस्था, इतिहास और बलिदान से जुड़े मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग की गई।
संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के संघर्ष, स्वाभिमान और बलिदान की महत्वपूर्ण विरासत है। इस स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने से इसके ऐतिहासिक महत्व को व्यापक पहचान मिलेगी और आने वाली पीढ़ियां आदिवासी समाज के योगदान से परिचित हो सकेंगी। ज्ञापन में केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों से मानगढ़ धाम के संरक्षण, विकास और ऐतिहासिक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया।
भीलवाड़ा की अखिल भारतीय बैठक में पारित हुआ था प्रस्ताव
मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की ओर से पहले ही प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। जानकारी के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को राजस्थान के भीलवाड़ा में आयोजित अखिल भारतीय बैठक में मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
इसी प्रस्ताव के समर्थन में देश के विभिन्न राज्यों में व्यापक ज्ञापन अभियान चलाने का निर्णय लिया गया। इस अभियान का उद्देश्य केंद्र सरकार और राज्य सरकारों का ध्यान मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक महत्व की ओर आकर्षित करना और इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग को मजबूत बनाना है।
गुजरात के 14 समेत कुल 60 जिलों में ज्ञापन अभियान
अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के प्रस्ताव के समर्थन में 22 अक्टूबर को विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के कुल 60 जिलों में ज्ञापन सौंपने का अभियान चलाया गया। अभियान के अंतर्गत गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली को शामिल किया गया।
राज्यवार ज्ञापन अभियान का विवरण:
| राज्य / केंद्रशासित क्षेत्र | जिलों की संख्या |
|---|---|
| गुजरात | 14 |
| राजस्थान | 17 |
| मध्य प्रदेश | 17 |
| महाराष्ट्र | 11 |
| दादरा एवं नगर हवेली | 1 |
| कुल | 60 |
संगठन के अनुसार, इस अभियान के माध्यम से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाई गई।
विशेष रूप से गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मानगढ़ धाम की ऐतिहासिक विरासत से जुड़े जनजातीय समुदायों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को प्राथमिकता दी गई है।
मानगढ़ धाम का इतिहास और गोविंद गुरु का योगदान
मानगढ़ धाम राजस्थान और गुजरात की सीमा के निकट स्थित एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थल है। यह स्थान आदिवासी समाज के महान समाज सुधारक और आध्यात्मिक नेता गोविंद गुरु के नेतृत्व में हुए जनजातीय जागरण और संघर्ष से जुड़ा हुआ है।
गोविंद गुरु ने आदिवासी समाज में शिक्षा, सामाजिक सुधार, एकता, आत्मसम्मान और जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए थे। उनके नेतृत्व में जनजातीय समाज ने अपने अधिकारों और सामाजिक उत्थान के लिए संगठित प्रयास किए।
मानगढ़ धाम का संबंध 17 नवंबर 1913 की ऐतिहासिक घटना से भी है, जब ब्रिटिश शासन और तत्कालीन रियासती बलों की कार्रवाई में बड़ी संख्या में आदिवासी लोगों की जान गई थी। इस घटना को मानगढ़ नरसंहार के नाम से जाना जाता है।
मानगढ़ धाम को आदिवासी समाज के बलिदान और स्वतंत्रता संघर्ष के एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में देखा जाता है। यहां गोविंद गुरु और उनके अनुयायियों के योगदान को याद किया जाता है। इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए जनजाति कल्याण आश्रम गुजरात ने मांग की है कि इस स्थल को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर इसकी विरासत को संरक्षित किया जाए।
राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की मांग
नर्मदा जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं जल्द शुरू करने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि मानगढ़ धाम का ऐतिहासिक महत्व केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। यह देश के जनजातीय समाज के संघर्ष और बलिदान की साझा विरासत है।
ज्ञापन में संबंधित सरकारी विभागों से इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व का मूल्यांकन कर राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण और विकास की दिशा में ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया गया। इसके अलावा मानगढ़ धाम की ऐतिहासिक संरचनाओं, सांस्कृतिक विरासत और उससे जुड़े महत्वपूर्ण स्थानों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष प्रयास करने की मांग भी की गई।
गोविंद गुरु से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित रखने पर जोर
जनजाति कल्याण आश्रम गुजरात ने ज्ञापन में गोविंद गुरु के जीवन, उनके सामाजिक सुधार आंदोलन और मानगढ़ धाम से जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्यों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया है।
संगठन ने मांग की कि गोविंद गुरु के योगदान से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों, ऐतिहासिक अभिलेखों और अन्य महत्वपूर्ण प्रमाणों को व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखा जाए। इसके साथ ही मानगढ़ धाम के इतिहास से संबंधित शोध और दस्तावेजीकरण को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता भी जताई गई।
संगठन का मानना है कि ऐतिहासिक साक्ष्यों का व्यवस्थित संरक्षण होने से शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और विद्यार्थियों को जनजातीय समाज के इतिहास को अधिक गहराई से समझने में मदद मिलेगी।
स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल हो मानगढ़ का इतिहास
ज्ञापन में एक महत्वपूर्ण मांग मानगढ़ धाम और गोविंद गुरु के इतिहास को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल करने की भी की गई है। जनजाति कल्याण आश्रम गुजरात ने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों को आदिवासी समाज के ऐतिहासिक संघर्ष, सामाजिक सुधार आंदोलनों और स्वतंत्रता संग्राम में दिए गए योगदान की जानकारी मिलनी चाहिए।
संगठन ने मांग की कि मानगढ़ धाम के इतिहास को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनाया जाए, ताकि विद्यार्थी गोविंद गुरु और उनके अनुयायियों के योगदान से परिचित हो सकें। इसके अलावा विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में मानगढ़ धाम से संबंधित ऐतिहासिक अनुसंधान और दस्तावेजीकरण को प्रोत्साहित करने का भी आग्रह किया गया।
गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकारों से समन्वित प्रयास की अपील
मानगढ़ धाम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए जनजाति कल्याण आश्रम गुजरात ने गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश की राज्य सरकारों से मिलकर कार्य करने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि मानगढ़ धाम का इतिहास इन राज्यों के जनजातीय समाज से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस स्थल के संरक्षण और विकास के लिए राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
ज्ञापन में तीनों राज्यों की सरकारों से संयुक्त रूप से प्रयास कर केंद्र सरकार के समक्ष मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग रखने का आग्रह किया गया। संगठन के अनुसार, समन्वित प्रयासों से मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकेगा।
गुजरात के मुख्यमंत्री और राज्यपाल से भी की गई अपील
जनजाति कल्याण आश्रम गुजरात ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर गुजरात के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और आदिवासी विकास मंत्री से भी विशेष अपील की है।
संगठन ने आग्रह किया कि राज्य सरकार इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करे और राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिलाने के लिए आवश्यक पहल करे। इसके साथ ही मानगढ़ धाम के संरक्षण, विकास और ऐतिहासिक पहचान को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार से सक्रिय भूमिका निभाने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय पहचान मिलने से जनजातीय समाज के इतिहास और बलिदान को उचित सम्मान मिलेगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के पदाधिकारी रहे उपस्थित
नर्मदा जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के अवसर पर जनजाति कल्याण आश्रम गुजरात के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान अरविंदभाई वसावा, अध्यक्ष, नर्मदा; रजनीश तड़वी, सहमंत्री, नर्मदा जिला; और डॉ. प्रेमप्यारी तड़वी, प्रांत मंत्री, उपस्थित रहे।
पदाधिकारियों ने मानगढ़ धाम के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दिलाने की मांग का समर्थन किया। उन्होंने मानगढ़ धाम की विरासत को सुरक्षित रखने और आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मुहिम तेज
मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग के समर्थन में 60 जिलों में चलाया गया ज्ञापन अभियान जनजातीय इतिहास और विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है।
जनजाति कल्याण आश्रम गुजरात का कहना है कि मानगढ़ धाम आदिवासी समाज की ऐतिहासिक चेतना, बलिदान और सामाजिक जागरण का प्रतीक है। ऐसे में इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देकर इसके महत्व को देशभर में पहचान दिलाई जानी चाहिए। संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों से इस मांग पर शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
शैशव राव – नर्मदा
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