प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रयागराज महाकुंभ 2025 के समापन पर लिखे गए ब्लॉग में महाकुंभ के महत्व, इसकी भव्यता और एकता के संदेश को खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने इसे “एकता का महाकुंभ” करार देते हुए कहा कि यह आयोजन 140 करोड़ भारतीयों की आस्था का संगम बना।
महाकुंभ – आस्था और एकता का संगम
पीएम मोदी ने अपने ब्लॉग में महाकुंभ को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि भारत की एकता, समरसता और संस्कृति का प्रतीक बताया। उन्होंने महाकुंभ को “एकता का महायज्ञ” कहते हुए लिखा कि इसमें पूरे देश से करोड़ों श्रद्धालु एक साथ, एक भाव में जुड़े, जो भारत की सांस्कृतिक शक्ति का उदाहरण है।
महाकुंभ संपन्न हुआ…एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ। प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में पूरे 45 दिनों तक जिस प्रकार 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ, एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ी, वो अभिभूत करता है! महाकुंभ के पूर्ण होने पर जो विचार मन में आए, उन्हें मैंने कलमबद्ध करने का… pic.twitter.com/TgzdUuzuGI
— Narendra Modi (@narendramodi) February 27, 2025
राम मंदिर से महाकुंभ तक – देशभक्ति से देवभक्ति
प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा (22 जनवरी 2024) से महाकुंभ तक की यात्रा को जोड़ते हुए कहा कि यह कालखंड देवभक्ति से देशभक्ति का उदाहरण बना। उन्होंने प्रयागराज के श्रृंगवेरपुर क्षेत्र का भी उल्लेख किया, जहां श्रीराम और निषादराज का मिलन हुआ था। यह प्रसंग भारतीय इतिहास में भक्ति और सद्भाव के संगम के रूप में प्रसिद्ध है।
महाकुंभ का ऐतिहासिक और प्रबंधन दृष्टिकोण
पीएम मोदी ने कहा कि महाकुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रबंधन और नीति-निर्माण के छात्रों के लिए अध्ययन का विषय भी है। यह आयोजन विश्व में अपनी तरह का अनूठा उदाहरण है, जहां बिना किसी औपचारिक निमंत्रण के करोड़ों लोग संगम तट पर पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई।
विश्व भी महाकुंभ की भव्यता से हैरान
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कैसे बिना किसी औपचारिक योजना के करोड़ों लोग प्रयागराज पहुंचे, और यह दुनिया के लिए भी एक अजूबे जैसा है। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद कुंभ का सुचारू आयोजन भारत की योजना और प्रबंधन क्षमताओं का भी प्रमाण है।
महाकुंभ में जिस भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने भागीदारी की है वो सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और विरासत को सुदृढ़ और समृद्ध रखने के लिए कई सदियों की एक सशक्त नींव भी रख गया है।
— Narendra Modi (@narendramodi) February 27, 2025
पीएम मोदी की महाकुंभ के प्रति श्रद्धा
पीएम मोदी ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को संजोते हुए लिखा कि वह उन चेहरों को कभी नहीं भूल सकते, जो संगम में स्नान के बाद संतोष और आनंद से दमक रहे थे। उन्होंने दिव्यांगों, महिलाओं, बुजुर्गों के कठिनाइयों के बावजूद कुंभ में शामिल होने की इच्छाशक्ति को भी सराहा।
प्रधानमंत्री मोदी का यह ब्लॉग महाकुंभ को केवल एक धार्मिक आयोजन से ऊपर उठाकर भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक एकता का द्योतक बनाता है। यह भारत की धार्मिक परंपराओं, इसकी जीवंत आस्था और प्रशासनिक दक्षता को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करता है।