अंतरिक्ष में नौ महीने से अधिक समय बिताने के बाद, सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की पृथ्वी पर वापसी की तैयारी चल रही है। लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहने के कारण, उन्हें पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के साथ पुनः समायोजित होने में कई शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
शारीरिक चुनौतियाँ:
- चलने-फिरने में कठिनाई (“बेबी फीट” सिंड्रोम): अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी के कारण, पैरों की त्वचा की मोटी परत कम हो जाती है, जिससे पैर संवेदनशील हो जाते हैं। इससे पृथ्वी पर लौटने पर चलने और संतुलन बनाने में कठिनाई हो सकती है।
- हड्डियों की कमजोरी: माइक्रोग्रैविटी के कारण हड्डियों की घनत्व में कमी आ सकती है, जिससे उनकी मजबूती प्रभावित होती है और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है।
- मांसपेशियों की कमजोरी: गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति में मांसपेशियों का उपयोग कम होता है, जिससे वे कमजोर हो सकती हैं।
- दृष्टि संबंधी समस्याएँ: लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से दृष्टि में बदलाव हो सकते हैं, जैसे धुंधलापन या फोकस करने में कठिनाई।
- हृदय संबंधी समस्याएँ: हृदय की मांसपेशियों में कमजोरी आ सकती है, क्योंकि अंतरिक्ष में हृदय को उतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती।
- प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी: अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
मानसिक चुनौतियाँ:
- मनोवैज्ञानिक समायोजन: लंबे समय तक पृथ्वी से दूर रहने के बाद, सामान्य जीवन में वापस आना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे चिंता या अवसाद जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए, सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को पृथ्वी पर लौटने के बाद विशेष पुनर्वास कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा, जो उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से पुनः समायोजित होने में सहायता करेंगे।