SpaceX के Dragon कैप्सूल से भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स की धरती पर वापसी
एलन मस्क की कंपनी SpaceX ने नासा के दो एस्ट्रोनॉट्स सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को अंतरिक्ष से वापस लाने के लिए अपने Dragon कैप्सूल को सफलतापूर्वक रवाना कर दिया है। यह कैप्सूल 286 दिनों से ISS (अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) में फंसे दोनों एस्ट्रोनॉट्स को धरती पर लाने वाला है।
Dragon कैप्सूल की वापसी
- SpaceX का Dragon कैप्सूल 18 मार्च की रात 3:27 बजे (भारतीय समय) पृथ्वी पर लैंड करेगा।
- यह कैप्सूल ISS से धरती की ओर यात्रा शुरू कर चुका है, जिसमें करीब 17 घंटे लगेंगे।
- सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विलमोर पिछले 9 महीनों से ISS में थे क्योंकि उनके स्पेसक्राफ्ट में तकनीकी खराबी आ गई थी।
Dragon कैप्सूल की खासियत
- 7 एस्ट्रोनॉट्स तक ले जाने में सक्षम यह दुनिया का पहला प्राइवेट स्पेसक्राफ्ट है, जो इंसानों को स्पेस स्टेशन तक पहुंचाने और वापस लाने का काम करता है।
- इसमें 16 डार्को थ्रस्टर्स लगे हैं, जो ऑर्बिट करेक्शन और स्टेबिलिटी में मदद करते हैं।
- दो ड्रैगन पैराशूट से लैस यह कैप्सूल सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करता है।
- 2020 में पहली बार SpaceX ने नासा के एस्ट्रोनॉट्स को ISS तक पहुँचाया था।
क्यों ISS में फंसी थीं सुनीता विलियम्स?
- उनके स्पेसक्राफ्ट में तकनीकी खराबी आने की वजह से उन्हें 286 दिनों तक ISS में रुकना पड़ा।
- नासा पिछले कई महीनों से उनके रेस्क्यू की योजना बना रहा था।
- इससे पहले 2023 में रूस के स्पेसक्राफ्ट में खराबी के कारण नासा के एस्ट्रोनॉट फ्रैंक रूबियो को 371 दिनों तक अंतरिक्ष में रहना पड़ा था।
SpaceX का Dragon कैप्सूल न केवल सुनीता विलियम्स और उनके साथी को सुरक्षित वापस ला रहा है, बल्कि यह अंतरिक्ष यात्रा में प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है। नासा और SpaceX की इस सफलता से भविष्य में अंतरिक्ष अभियानों को और गति मिलेगी।