बजट सत्र का दूसरा भाग लगातार हंगामे की भेंट चढ़ता जा रहा है, और इसका असर महत्वपूर्ण चर्चाओं पर पड़ रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे कृषि और किसान कल्याण को लेकर चर्चा ही नहीं करना चाहते। उन्होंने विपक्ष के इस रवैये को “पाप” और “अपराध” करार दिया।
शिवराज का बयान: “विपक्ष ने किसानों पर चर्चा रोककर पाप किया”
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गुरुवार को संसद में कृषि और किसान कल्याण पर चर्चा प्रस्तावित थी, लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते चर्चा संभव नहीं हो पाई। उन्होंने कहा—
“चर्चा लोकतंत्र के प्राण हैं। संवाद से ही कल्याण के कार्य आगे बढ़ते हैं। किसानों का कल्याण मोदी जी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम चाहते थे कि प्रतिपक्ष भी इस विषय पर सार्थक चर्चा करे, अच्छे सुझाव दे। लेकिन विपक्ष ने हंगामा करके चर्चा को बाधित करने का पाप किया है।”
“अगर विपक्ष बाधा डालता है तो उनकी मंशा स्पष्ट हो जाएगी”
शिवराज ने विपक्ष से अपील की कि कम से कम आज (शुक्रवार) वह चर्चा होने दें। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से इस चर्चा की प्रतीक्षा कर रहे थे ताकि विपक्ष भी अपनी बात रख सके। उन्होंने कहा—
“अगर विपक्ष फिर बाधा डालता है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि वे दिखावे के लिए किसानों की बात करते हैं, लेकिन असल में चर्चा ही नहीं चाहते।”
गुरुवार को लोकसभा में जमकर हंगामा
गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही को तीन बार स्थगित करना पड़ा।
- DMK सांसदों ने नारे लिखी टी-शर्ट पहनकर विरोध जताया।
- इसके बाद हंगामे के कारण पहले कार्यवाही को 12 बजे तक, फिर 2 बजे तक, और अंत में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
अब देखना होगा कि शुक्रवार को संसद में कृषि और किसानों पर चर्चा हो पाती है या फिर हंगामे का दौर जारी रहेगा।