वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 के लोकसभा में पारित होने के बाद अब यह राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहां संख्या बल के हिसाब से सरकार के पास इसे पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन दिख रहा है। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने और कथित अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान:
- वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा: इस संशोधन से वक्फ संपत्तियों को अवैध रूप से बेचने या सस्ते किराए पर देने वालों पर सख्ती की जाएगी।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: वक्फ बोर्डों को अधिक जवाबदेह बनाया जाएगा और वित्तीय अनियमितताओं की जांच की जाएगी।
- धार्मिक कार्यों में कोई हस्तक्षेप नहीं: सरकार ने स्पष्ट किया कि मस्जिद या अन्य धार्मिक कार्यों में कोई दखल नहीं दिया जाएगा, बल्कि सिर्फ संपत्ति प्रबंधन को पारदर्शी बनाया जाएगा।
- कानूनी सुधार: वक्फ बोर्ड की शक्तियों में बदलाव कर, विवादित संपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाएगा।
राज्यसभा में नंबर गेम:
- एनडीए के पास 125 सांसदों का समर्थन होने की उम्मीद है, जबकि बहुमत के लिए 119 सांसदों की जरूरत है।
- विपक्ष के पास 95 सांसद हैं, जो विधेयक के खिलाफ हैं।
- 16 सांसद (BRS, BJD, AIADMK, BSP) का रुख स्पष्ट नहीं है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि इनमें से कुछ समर्थन कर सकते हैं या मतदान से अनुपस्थित रह सकते हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
- बीजेपी और सहयोगी दलों का समर्थन: सरकार का तर्क है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों को बचाने और अनियमितताओं को रोकने के लिए जरूरी है।
- विपक्ष का विरोध: कांग्रेस, सपा, और अन्य दलों का कहना है कि इससे मुकदमेबाजी बढ़ेगी और अल्पसंख्यक समुदाय की संपत्तियों पर सरकार की नजर है।
आगे की संभावना:
अगर राज्यसभा में यह बिल पारित हो जाता है, तो यह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में बड़े बदलाव लाने वाला कानून बन सकता है। हालांकि, विपक्षी दल इसे लेकर अदालत का रुख भी कर सकते हैं।