आरबीआई की नई डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता: प्रोफाइल और जिम्मेदारियाँ
केंद्र सरकार ने बुधवार (2 अप्रैल, 2025) को अर्थशास्त्री पूनम गुप्ता को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। वह ‘नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च’ (NCAER) की महानिदेशक के पद से आरबीआई में आई हैं। पूनम गुप्ता की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक 7 से 9 अप्रैल के बीच प्रस्तावित है।
महत्वपूर्ण तथ्य:
- पूनम गुप्ता आरबीआई की चौथी महिला डिप्टी गवर्नर हैं।
- इससे पहले KJ उदेशी (2003), श्यामला गोपीनाथ (2004) और उषा थोराट (2005-2010) इस पद पर रह चुकी हैं।
- पूनम गुप्ता से पहले माइकल देबव्रत पात्रा (2020-2025) इस पद पर थे।
- आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
पूनम गुप्ता का प्रोफेशनल सफर
1. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठनों में अनुभव
पूनम गुप्ता विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसी शीर्ष संस्थाओं में दो दशकों तक विभिन्न वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुकी हैं। उनके पास अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना, केंद्रीय बैंकिंग, सार्वजनिक ऋण और राज्य वित्त के क्षेत्रों में विशेषज्ञता है।
उन्होंने भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान मैक्रोइकोनॉमिक्स और व्यापार पर टास्क फोर्स की अध्यक्षता की थी। वह प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) और 16वें वित्त आयोग की एडवाइजरी काउंसिल की सदस्य भी हैं।
2. शिक्षाविद और अनुसंधान कार्य
पूनम गुप्ता ने कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ाया है, जिनमें शामिल हैं:
- दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (DSE), दिल्ली विश्वविद्यालय
- यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड, अमेरिका
- इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टिट्यूट (ISI), दिल्ली (विज़िटिंग फैकल्टी)
- इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशन्स (ICRIER) में प्रोफेसर
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) की आरबीआई चेयर प्रोफेसर
3. शिक्षा और सम्मान
- पूनम गुप्ता ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर्स किया।
- अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड से इकोनॉमिक्स में मास्टर्स और पीएचडी की।
- 1998 में एक्ज़िम बैंक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
डिप्टी गवर्नर के रूप में उनकी जिम्मेदारियाँ
आरबीआई में चार डिप्टी गवर्नर होते हैं, जिनमें से प्रत्येक को विभिन्न कार्यक्षेत्रों की जिम्मेदारी दी जाती है। पूनम गुप्ता को मौद्रिक नीति (Monetary Policy), विदेशी मुद्रा प्रबंधन (Forex Management), आर्थिक अनुसंधान (Economic Research) और वित्तीय स्थिरता (Financial Stability) जैसे प्रमुख क्षेत्रों की जिम्मेदारी मिल सकती है।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक आर्थिक सुस्ती, महंगाई और डॉलर की मजबूती जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। वह आरबीआई की नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी और केंद्रीय बैंक के दृष्टिकोण को मजबूत करेंगी।
भारत के लिए संभावित प्रभाव
- मुद्रास्फीति प्रबंधन: पूनम गुप्ता की विशेषज्ञता का लाभ आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति को मिलेगा, जो मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और ब्याज दरों से संबंधित निर्णयों में मदद करेगा।
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: उनके वर्ल्ड बैंक और IMF के अनुभव को देखते हुए, वह भारत की वैश्विक वित्तीय रणनीतियों को और मजबूत कर सकती हैं।
- एफडीआई और व्यापार नीति: विदेशी निवेश आकर्षित करने और व्यापार संतुलन बनाए रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
- डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक: उनकी विशेषज्ञता आरबीआई की डिजिटल मुद्रा (CBDC) और फिनटेक क्षेत्र में नियमन की नीतियों को दिशा दे सकती है।
पूनम गुप्ता की आरबीआई डिप्टी गवर्नर के रूप में नियुक्ति भारत की मौद्रिक नीति और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके व्यापक अनुभव और ज्ञान से आरबीआई को वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी। उनकी नियुक्ति से केंद्रीय बैंक की निर्णय प्रक्रिया में आर्थिक शोध और वैश्विक दृष्टिकोण को अधिक बल मिलेगा।