कश्मीरीगंज, जो केदारखंड के नाम से अयोध्या से जुड़ा हुआ क्षेत्र माना जाता है, वहां स्थित श्रीराम मंदिर का इतिहास 1398 से शुरू होता है। यह मंदिर जगद्गुरु रामानंदाचार्य की प्रेरणा से उनके शिष्य अनंतानंदाचार्य द्वारा बनवाया गया था। मंदिर एक पंचायतन शैली में बना था, जिसमें रामदरबार, राधाकृष्ण, भगवान शंकर, मां दुर्गा और हनुमान जी की मूर्तियां प्रतिष्ठित थीं।
1669 – औरंगजेब के काल में ध्वंस
मुगल शासक औरंगजेब ने 1669 में काशी के अन्य मंदिरों के साथ-साथ इस प्राचीन श्रीराम मंदिर को भी ध्वस्त करा दिया। उस समय की कई मूर्तियां टूटीं, लेकिन लक्ष्मी-नारायण की मूर्तियां सुरक्षित रह गईं, जो आज भी मंदिर में मौजूद हैं।
बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी वाराणसी में आज श्री राम मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में सहभाग किया।
750 वर्षों की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की एक समृद्ध परंपरा के नवीनीकरण के साथ आज जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
संपूर्ण कार्यक्रम के प्रणेता, पूज्य… pic.twitter.com/tP7bDA8xFe
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) April 3, 2025
1700 में पहला पुनर्निर्माण
सियाराम दास ने वर्ष 1700 में मंदिर का दोबारा निर्माण कराया। यद्यपि यह निर्माण सीमित रूप में हुआ, परंतु इसने आध्यात्मिक परंपरा को जीवित रखा।
गोस्वामी तुलसीदास का जुड़ाव
महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसी स्थान पर पांच वर्षों तक रहकर अध्ययन किया था। उनके हाथों की लिखी कुछ पांडुलिपियाँ आज भी यहां सुरक्षित हैं, जो इसे तुलसी-परंपरा का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाती हैं।
अब भव्य पुनर्निर्माण – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया शिलान्यास
हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मंदिर के पुनर्निर्माण का शिलान्यास किया। यह परियोजना अब 8000 वर्ग फीट में फैली होगी और तीन वर्षों में पूर्ण की जाएगी।
मंदिर की विशेषताएं:
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चार तल होंगे:
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प्रथम तल: साधु-संतों का निवास
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द्वितीय तल: अतिथि निवास
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तृतीय तल: छात्रावास
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चतुर्थ तल: कक्षा संचालन व भोजनशाला
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मंदिर में रामानंदाचार्य, अनंतानंदाचार्य और तुलसीदास जी की प्रतिमाएं भी स्थापित होंगी।
इस मंदिर का पुनर्निर्माण न केवल एक धार्मिक प्रतीक है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक भी बन रहा है।
कश्मीरीगंज का श्रीराम मंदिर अब एक भव्य आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पुनः उभर रहा है, जो धर्म, इतिहास और शिक्षा तीनों का संगम होगा।