भारत और गुयाना के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नया और मजबूत आयाम जुड़ रहा है, विशेष रूप से “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद वैश्विक मंच पर भारत के पक्ष में समर्थन को लेकर। इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की यात्रा कूटनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत-गुयाना संबंध: प्रमुख बातें
🔹 गुयाना के प्रधानमंत्री ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) मार्क एंथनी फिलिप्स का बयान:
- भारत के साथ सहयोग को और बढ़ाने की बात कही।
- भारतीय निवेश का स्वागत किया।
- आतंकवाद के खिलाफ भारत का समर्थन किया, कहा:
“गुयाना आतंकवाद के किसी भी कृत्य की निंदा करता है… हर राष्ट्र को शांति से रहने का अधिकार है।”
भारतीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की यात्रा
शशि थरूर (कांग्रेस सांसद):
- प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए रात्रिभोज और गर्मजोशी भरे स्वागत की सराहना की।
- बताया कि गुयाना के कई वरिष्ठ मंत्री भी बातचीत में शामिल थे।
- आतंकवाद और वैश्विक शांति पर विचार-विमर्श हुआ।
तेजस्वी सूर्या (भाजपा सांसद):
- गुयाना के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों ने “ऑपरेशन सिंदूर” का समर्थन किया।
- गुयाना, CARICOM का संस्थापक सदस्य है और UNSC में गैर-स्थायी सदस्य होने के नाते भारत के पक्ष में बोलता रहा है।
- पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और भारत की जवाबी कार्रवाई का समर्थन किया।
मिलिंद देवड़ा (शिवसेना सांसद):
- बताया कि भारत से 7 सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख स्पष्ट करने भेजे गए हैं।
- गुयाना के 59वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वहाँ मौजूद रहना “सौभाग्य की बात” बताया।
- गुयाना के शीर्ष नेतृत्व का भारत के प्रति समर्थन “स्पष्ट और निर्णायक” बताया।
इस यात्रा के व्यापक महत्व:
- राजनयिक मजबूती: गुयाना जैसे रणनीतिक कैरेबियाई राष्ट्रों से भारत को खुला समर्थन मिलना ऑपरेशन सिंदूर के अंतरराष्ट्रीय वैधता को बढ़ाता है।
- विदेश नीति में सर्वदलीय एकता: यह दौरा दिखाता है कि भारत में आतंकी हमलों और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में सभी राजनीतिक दल एकमत हैं।
- CARICOM और UNSC सहयोग: गुयाना का CARICOM और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सक्रिय होना भारत के लिए एक डिप्लोमैटिक गेन है।
- गुयाना के साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव: बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग गुयाना में बसे हुए हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और भी गहरे हैं।
भारत का यह सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल न केवल राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत कर रहा है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत के वैश्विक अभियान को भी धार दे रहा है। गुयाना का स्पष्ट समर्थन और भारत में निवेश को लेकर उसकी सकारात्मकता द्विपक्षीय संबंधों को और ऊंचाई पर ले जा सकती है।