कर्नाटक के कोप्पल ज़िले में स्थित श्री अंजनेय मंदिर के प्रबंधन और पुजारी पद को लेकर चल रहे विवाद की एक गम्भीर और संवेदनशील स्थिति को दर्शाती है।
विवाद की पृष्ठभूमि
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स्थान: अंजनेय पहाड़ी, तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित श्री अंजनेय मंदिर — हनुमान जी के जन्मस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त।
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मुख्य पुजारी: विद्यादास बाबाजी, रामानंदी संप्रदाय से, जिनका समुदाय 120 वर्षों से मंदिर की पूजा-अर्चना कर रहा है।
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सरकारी हस्तक्षेप:
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2018 में कर्नाटक सरकार ने 1997 के अधिनियम की धारा 23 के तहत मंदिर का प्रबंधन अपने अधीन लिया।
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इसके बाद से विद्यादास बाबाजी को हटाने के प्रयास हुए।
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कानूनी घटनाक्रम
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14 फरवरी 2023: कर्नाटक हाई कोर्ट ने विद्यादास को पूजा से न रोकने का अंतरिम आदेश दिया।
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मार्च 2025:
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जिला प्रशासन ने इस आदेश की अवहेलना की।
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विद्यादास को मंदिर से बाहर करने, बिजली काटने और नई पुजारी नियुक्ति की कोशिशें हुईं।
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आरोप है कि उन्हें ड्रग्स केस में फँसाने की भी साजिश रची गई।
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सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
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सुनवाई: जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच में हुई।
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कोर्ट के निर्देश:
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विद्यादास बाबाजी को मंदिर में पूजा-पाठ जारी रखने और मंदिर परिसर में एक कमरे में रहने की अनुमति दी गई।
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कोर्ट ने राज्य सरकार को हाई कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा।
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पालन न होने की स्थिति में सख्त रुख अपनाने की चेतावनी दी।
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धार्मिक और राजनीतिक विवाद
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हिंदू समुदाय की चिंता:
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यह मंदिर बजरंग बली के जन्मस्थान के रूप में पूजनीय है।
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सरकार द्वारा मंदिर पर नियंत्रण को धार्मिक हस्तक्षेप और परंपरा से खिलवाड़ माना जा रहा है।
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कॉन्ग्रेस सरकार की मंशा पर सवाल:
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विपक्ष और पुजारी पक्ष का आरोप है कि यह राजनीतिक प्रेरणा से किया गया कदम है।
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फिलहाल की स्थिति
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सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम निर्देश विद्यादास बाबाजी के पक्ष में है।
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मंदिर में पूजा-पाठ जारी है, लेकिन अंतिम निर्णय लंबित है।
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कर्नाटक सरकार को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में अपने अगले कदमों पर सावधानी बरतनी होगी।