आपके द्वारा साझा की गई रिपोर्ट से साफ है कि मई 2025 का मौसम देशभर में अजीबोगरीब और ऐतिहासिक रूप से असामान्य रहा। गर्मी के लिए कुख्यात मई महीने में जब लोग लू से बेहाल रहते हैं, इस बार बारिश, तूफान और ठंडी हवाओं ने पूरे परिदृश्य को उलटकर रख दिया।
मई 2025 का असामान्य मौसम – प्रमुख तथ्य1. दिल्ली – रिकॉर्ड तोड़ बारिश2. कर्नाटक – 125 साल का रिकॉर्ड टूटा3. केरल – रेड अलर्ट4. पूर्वोत्तर भारतमौसम में इस बड़े बदलाव के कारणपश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance)जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंगचक्रवातीय और प्रतिचक्रवातीय हवाएंप्री-मॉनसून ट्रफ का एक्टिव होनासमय से पहले मॉनसून की दस्तकनिष्कर्ष
मई 2025 का असामान्य मौसम – प्रमुख तथ्य
1. दिल्ली – रिकॉर्ड तोड़ बारिश
- 188.9 मिमी बारिश, जो सामान्य से 202% अधिक
- इससे पहले 2008 में 165 मिमी वर्षा और 1991 में भारी बारिश दर्ज की गई थी
- हीटवेव नहीं चली, बल्कि ठंडी हवाएं महसूस की गईं
- 2, 17, 21, 25 मई को भारी बारिश और आंधी-तूफान
- हादसों में 10 लोगों की मौत
2. कर्नाटक – 125 साल का रिकॉर्ड टूटा
- 28 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
- भूस्खलन और भारी नुकसान
- दक्षिण कन्नड़ में 3 मौतें, एक परिवार के 5 लोग मलबे में दबे
3. केरल – रेड अलर्ट
- IMD ने 8 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया
- लगातार भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित
4. पूर्वोत्तर भारत
- 31 मई तक अत्यधिक भारी बारिश की संभावना
- असम, मेघालय, अरुणाचल जैसे राज्यों में असर
मौसम में इस बड़े बदलाव के कारण
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance)
- जो आमतौर पर सर्दियों में सक्रिय रहते हैं, वे इस बार मई में भी सक्रिय रहे
जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वॉर्मिंग
- वातावरण की नमी पकड़ने की क्षमता बढ़ी, जिससे बारिश और तूफानों की तीव्रता व आवृत्ति में बढ़ोतरी
चक्रवातीय और प्रतिचक्रवातीय हवाएं
- राजस्थान, अरब सागर, और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी से आंधी-बारिश का सिलसिला बना
प्री-मॉनसून ट्रफ का एक्टिव होना
- दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जैसे क्षेत्रों में बंगाल की खाड़ी से आई नमी के कारण भारी वर्षा
समय से पहले मॉनसून की दस्तक
- सामान्यतः 1 जून को मॉनसून केरल पहुंचता है
- इस बार 24 मई को ही मॉनसून पहुंच गया
- महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, ओडिशा में भारी बारिश शुरू
निष्कर्ष
मई 2025 का मौसम जलवायु असंतुलन और ग्लोबल वॉर्मिंग की स्पष्ट चेतावनी है। मौसम चक्र के इस बदलाव से न केवल खेती-किसानी प्रभावित होगी, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और जनजीवन पर भी गहरा असर पड़ेगा।