गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (ATS) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए अल-कायदा के भारतीय उपमहाद्वीप इकाई — AQIS (Al-Qaeda in Indian Subcontinent) — से जुड़े एक सक्रिय आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस अभियान के तहत चार संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से दो आतंकियों को गुजरात से, जबकि एक-एक को दिल्ली और नोएडा से पकड़ा गया है। यह ऑपरेशन न केवल भारत की आतंरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश की सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और कुशल खुफिया प्रणाली को भी दर्शाता है।
गिरफ्तार किए गए सभी संदिग्धों की उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच है। जांच एजेंसियों को इनपुट मिला था कि इन आतंकियों को भारत में किसी बड़े टारगेट या महत्वपूर्ण स्थान पर हमला करने की जिम्मेदारी सौंपी जानी थी। यह भी सामने आया है कि ये चारों आतंकी एक-दूसरे से सोशल मीडिया ऐप्स के जरिए संपर्क में थे। इसके साथ ही, इनके पाकिस्तान या अन्य सीमापार क्षेत्रों से संपर्क होने की भी पुष्टि हुई है, जो यह संकेत देता है कि यह आतंकी मॉड्यूल अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से संचालित हो रहा था।
एक बड़ी सफलता में, गुजरात ATS ने अहमदाबाद, गुजरात के साथ-साथ नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख आतंकवाद विरोधी अभियान में भारतीय उपमहाद्वीप में अल कायदा (AQIS) से जुड़े चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया।
वे व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों को भर्ती कर रहे थे।#GujaratATS |… pic.twitter.com/2fhUcysQVy
— One India News (@oneindianewscom) July 23, 2025
ATS की प्राथमिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन युवकों की सोच को कट्टरपंथी बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग किया गया। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें कट्टरपंथी विचारधाराओं से प्रभावित किया गया, और फिर धीरे-धीरे उन्हें आतंकी गतिविधियों में शामिल किया गया। फिलहाल, सभी संदिग्धों से गहन पूछताछ जारी है और ATS जल्द ही इस पूरे ऑपरेशन से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा करेगी।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब AQIS से जुड़ी गतिविधियों का गुजरात में भंडाफोड़ हुआ हो। वर्ष 2023 में भी इसी आतंकी संगठन से संबंध रखने के आरोप में अहमदाबाद से चार बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था।
अल-कायदा: एक वैश्विक आतंकी संगठन
अल-कायदा को दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठनों में से एक माना जाता है। इसकी स्थापना 1988 में ओसामा बिन लादेन, अब्दुल्ला आज़म और अन्य जिहादी विचारधारा के लोगों द्वारा की गई थी। प्रारंभ में यह संगठन अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ लड़ने वाले मुजाहिदीनों का समर्थन करने के उद्देश्य से बनाया गया था। लेकिन समय के साथ यह एक वैश्विक आतंकी नेटवर्क में बदल गया।
2001 में अमेरिका में हुए 9/11 हमलों के बाद अल-कायदा दुनिया की निगाहों में सबसे खतरनाक आतंकी संगठन बन गया। ओसामा बिन लादेन की 2011 में अमेरिकी ऑपरेशन में मौत के बाद अयमान अल-जवाहिरी ने इसकी कमान संभाली। जवाहिरी की भी जुलाई 2022 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत हो गई। हालांकि, संगठन ने अभी तक आधिकारिक रूप से अपने नए नेता की घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जाता है कि मिस्र का सैफ अल-अदल इसका अगला नेता हो सकता है।
भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश के लिए इस प्रकार के आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ होना एक बड़ी राहत की बात है, लेकिन साथ ही यह इस बात का संकेत भी है कि देश को आतंकवाद के खिलाफ सतत सतर्कता बनाए रखनी होगी।