भारत ने हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2025 में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए 85वें स्थान से छलांग लगाकर 77वें स्थान पर अपना स्थान बना लिया है। यह पिछले कई वर्षों में भारत की सबसे बड़ी छलांगों में से एक मानी जा रही है। हेनले पासपोर्ट इंडेक्स एक वैश्विक रैंकिंग होती है जो यह बताती है कि किसी देश का पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितना शक्तिशाली है — यानी उस पासपोर्ट के धारक कितने देशों में बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल के माध्यम से यात्रा कर सकते हैं।
इस नई रैंकिंग के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब 59 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा प्राप्त है। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में दो अधिक है, यानी भारतीयों को दो नए देशों ने वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा दी है। इसके अलावा कुछ देशों ने वीजा प्रक्रिया को भारतीयों के लिए आसान बना दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा करना और भी सहज हुआ है।
Passport Ranking: भारत ने पासपोर्ट रैंकिंग में आठ स्थानों की लगाई छलांग, 59 देशों में वीजा मुक्त यात्रा संभव#India | #IndianPassport | #Singapore | #GlobalPassportIndex | pic.twitter.com/JYRVOZKdca
— One India News (@oneindianewscom) July 23, 2025
इन सुविधाओं में वीजा-ऑन-अराइवल (Visa on Arrival) प्रमुख है, जिसमें किसी देश में पहुँचने पर एयरपोर्ट पर ही वीजा प्राप्त किया जा सकता है, जिससे पहले से वीजा आवेदन की आवश्यकता नहीं रहती। इससे भारतीय यात्रियों को पर्यटन, व्यापार या आपातकालीन स्थितियों में यात्रा करने में सहूलियत मिलती है।
2025 की इस रैंकिंग में सिंगापुर ने शीर्ष स्थान बरकरार रखा है, जिसके नागरिक 193 देशों में बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। जापान दूसरे स्थान पर है, जहां के पासपोर्ट धारकों को 190 देशों में वीजा-फ्री यात्रा की अनुमति है। यह दिखाता है कि इन देशों के पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक स्वीकार्य और प्रभावशाली माने जाते हैं।
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स को हर वर्ष हेनले एंड पार्टनर्स नामक संगठन द्वारा जारी किया जाता है। यह रैंकिंग अंतरराष्ट्रीय एयर ट्रैवल एसोसिएशन (IATA) के आधिकारिक डेटा पर आधारित होती है और यह दर्शाती है कि किसी देश के नागरिकों को उनके पासपोर्ट के आधार पर वैश्विक यात्रा में कितनी स्वतंत्रता मिलती है।
भारत की इस छलांग को राजनयिक प्रयासों, व्यापारिक संबंधों और वैश्विक मंच पर बढ़ती साख के रूप में भी देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में भारत यदि इस गति से अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करता रहा, तो यह रैंकिंग और बेहतर हो सकती है।