बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर और लालू परिवार में खुला घमासान छिड़ गया है। चुनाव परिणामों ने न सिर्फ संगठनात्मक कमजोरियों को उजागर किया है, बल्कि परिवार के भीतर मतभेदों को भी सतह पर ला दिया है।
🔹 संजय यादव के खिलाफ कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूटा
17 नवंबर 2025 को राबड़ी देवी के आवास के बाहर पहुंचे बड़ी संख्या में आरजेडी कार्यकर्ताओं ने खुलकर नाराजगी जताई और “संजय यादव मुर्दाबाद” के नारे लगाए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि टिकट बंटवारे, चुनावी रणनीति, सोशल मीडिया अभियान और महागठबंधन के समन्वय में गंभीर चूकें हुईं, जिनकी वजह से आरजेडी को भारी नुकसान हुआ। कार्यकर्ताओं के अनुसार, पूरे चुनाव अभियान पर संजय यादव का अत्याधिक नियंत्रण था और उनकी गलतियों ने पार्टी का ग्राफ नीचे ला दिया।
🔹 रोहिणी आचार्य बनाम तेजस्वी—परिवार का विवाद सार्वजनिक हुआ
लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य पहले ही अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर चुकी हैं। राबड़ी आवास पर हुई एक बैठक में रोहिणी ने चुनावी हार के लिए तेजस्वी के सलाहकार संजय यादव को जिम्मेदार बताया। रोहिणी के मुताबिक जब उन्होंने यह बात सीधे तेजस्वी से कही तो तेजस्वी गुस्से में आपा खो बैठे, गालियाँ दीं और चप्पल फेंककर मारी। यह खुलासा खुद रोहिणी ने सोशल मीडिया पर किया, जिसने परिवार के भीतर तनाव बढ़ा दिया।
रोहिणी आचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि संजय यादव की वजह से उनका परिवार से और राजनीति से नाता टूटा। उनकी मानें तो तेजस्वी के पास वही पहुँच पाता है, जिसे संजय यादव अनुमति देते हैं, और पार्टी में कई फैसले उन्हीं की मर्जी से होते हैं।
🔹 टिकट बंटवारे और चुनाव रणनीति में संजय की भूमिका पर सवाल
पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि—
- गलत लोगों को टिकट दिए गए
- कई मजबूत दावेदारों को नजरअंदाज किया गया
- कांग्रेस के साथ तालमेल बिगाड़ने में भी संजय यादव की भूमिका रही
- ग्राउंड रिपोर्ट और स्थानीय नेताओं की सलाह को अनसुना किया गया
कार्यकर्ताओं का मानना है कि संजय यादव की चुनावी योजनाएँ जमीन से कट चुकी थीं, जिसका सीधा असर हार के रूप में देखने को मिला।
🔹 तेजस्वी यादव का संजय यादव पर पूरा भरोसा—बचाव में डटकर खड़े
जनता और कार्यकर्ताओं के गुस्से के बावजूद तेजस्वी यादव खुलकर अपने सलाहकार संजय का बचाव कर रहे हैं। विधायक दल की बैठक में तेजस्वी ने साफ कहा कि हार के लिए संजय यादव को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता, क्योंकि उन्होंने “बहुत मेहनत” की है।
और सबसे बड़ा राजनीतिक दाँव यह था कि तेजस्वी ने कहा कि वह विधायक दल के नेता नहीं बनना चाहते, जिससे बैठक में मौजूद विरोधी खेमे पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना और वे शांत हो गए।
इस बैठक में लालू यादव खुद भी मौजूद थे, जो तेजस्वी के साथ खड़े दिखे। उनकी मौजूदगी ने असंतुष्ट नेताओं को और दबा दिया और संजय यादव के खिलाफ उठती आवाजों पर विराम लग गया।
🔹 निष्कर्ष—आरजेडी में संकट गहरा, परिवार में दूरी बढ़ी
आरजेडी की हार ने—
- संगठन के भीतर गंभीर असंतोष,
- नेतृत्व पर सवाल,
- परिवार में बढ़ते तनाव
को उजागर कर दिया है।
हालाँकि तेजस्वी यादव अपने करीबी संजय यादव के प्रति दृढ़ समर्थन बनाए हुए हैं, लेकिन पार्टी के भीतर उबल रहा गुस्सा आने वाले दिनों में बड़े संगठनात्मक बदलाव और नई राजनीतिक खाई पैदा कर सकता है।
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