दक्षिण अफ्रीका की धरती पर पहली बार आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन न केवल प्रभावशाली रहा, बल्कि इसे वैश्विक दक्षिण की आवाज और न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था की मांग के रूप में भी देखा गया। ‘सॉलिडैरिटी, इक्वालिटी और सस्टेनेबिलिटी’ थीम पर बोलते हुए पीएम मोदी ने भारत की प्राचीन अवधारणा ‘वसुधैव कुटुंबकम्’—अर्थात दुनिया एक परिवार है—को अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोहराया। उन्होंने इसे आधुनिक शब्दों में “वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर” के रूप में प्रस्तुत किया और कहा कि अब समय आ गया है जब दुनिया को प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और संघर्ष के बजाय मानवीय संवेदनाओं के केंद्र में रहकर निर्णय लेने चाहिए।
#WATCH | Johannesburg, South Africa | Prime Minister Narendra Modi attends the G-20 Summit
(Source: Reuters/Host Broadcaster Pool) pic.twitter.com/NtDmjfl0cF
— ANI (@ANI) November 22, 2025
पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक महत्व से की। उन्होंने याद दिलाया कि इसी महाद्वीप की मिट्टी पर महात्मा गांधी ने सत्याग्रह और समानता की विचारधारा को जन्म दिया था, जो आगे चलकर भारत और दुनिया दोनों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध हुई। उन्होंने कहा कि अफ्रीका में पहली बार जी-20 का आयोजन होना केवल एक औपचारिक घटना नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की ऐतिहासिक मान्यता है। उन्होंने गर्व से कहा कि भारत की अध्यक्षता में 2023 में अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता दिलाना एक ऐसा निर्णय था जिसने विकासशील देशों की सामूहिक इच्छा और समान प्रतिनिधित्व की मांग को सशक्त बनाया।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने तीन महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेष बल दिया। पहला था समावेशी आर्थिक विकास। उन्होंने कहा कि विकास का अर्थ तभी सार्थक है जब उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, UPI और आयुष्मान भारत जैसे मॉडल इस दिशा में मिसाल हैं। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि विकासशील देशों को आगे बढ़ने के लिए सस्ती पूंजी, तकनीकी सहयोग और बाजार तक पहुंच की आवश्यकता है।
Spoke at the first session of the G20 Summit in Johannesburg, South Africa, which focussed on inclusive and sustainable growth. With Africa hosting the G20 Summit for the first time, NOW is the right moment for us to revisit our development parameters and focus on growth that is… pic.twitter.com/AxHki7WegR
— Narendra Modi (@narendramodi) November 22, 2025
दूसरा बड़ा मुद्दा था जलवायु परिवर्तन और जलवायु न्याय। पीएम मोदी ने कहा कि जलवायु संकट किसी राष्ट्र की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी मानवता की चुनौती है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत पहले ही 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य तय कर चुका है, लेकिन ग्लोबल साउथ को जलवायु न्याय मिलना जरूरी है। उन्होंने लॉस एंड डैमेज फंड को मजबूत करने का आह्वान किया ताकि प्रभावित देशों को वास्तविक सहायता मिल सके।
तीसरा मुद्दा था कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और वैश्विक संस्थानों में सुधार। पीएम मोदी ने कहा कि AI का विकास मानव मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए ताकि यह असमानता और आर्थिक अंतर न बढ़ाए। उन्होंने वैश्विक शासन संस्थाओं—जैसे संयुक्त राष्ट्र—में संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता दोहराई और कहा कि लोकतांत्रिक विश्व व्यवस्था तभी संभव है जब सभी क्षेत्रों की बराबर की आवाज हो।
अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने आतंकवाद, महामारी, गरीबी और आर्थिक अस्थिरता जैसी साझा चुनौतियों पर वैश्विक एकजुटता की अपील की। उन्होंने कहा, “भारत की विकास यात्रा और हमारी सोच पूर्ण मानवतावाद पर आधारित है, जहां किसी की पीड़ा केवल एक देश की समस्या नहीं, बल्कि पूरी मानवता की जिम्मेदारी मानी जाती है।” उनके भाषण के बाद सोशल मीडिया पर #ModiAtG20 ट्रेंड होने लगा और कई वैश्विक विश्लेषकों ने इसे भारत की उभरती दुनिया-स्तरीय नेतृत्व भूमिका का संकेत बताया।
सम्मेलन 23 नवंबर तक जारी रहेगा, और अंतिम घोषणा के लिए सहमति बनने की प्रक्रिया चल रही है। अमेरिकी नेतृत्व के अनुपस्थित रहने के बावजूद पीएम मोदी की उपस्थिति और मजबूत वक्तव्य ने ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक विमर्श के केंद्र में पहुंचा दिया है।
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