भारी बर्फबारी न होने के बावजूद भारतीय सेना ने सर्दियां शुरू होते ही जम्मू क्षेत्र के ऊपरी इलाकों में गश्त तेज कर दी है। इसका मुख्य उद्देश्य घुसपैठ को रोकना और संवेदनशील इलाकों पर लगातार निगरानी बनाए रखना है। सेना ने ऊंची चोटियों, घने जंगलों और पहाड़ी दर्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है, क्योंकि बर्फ की कमी के चलते आतंकवादी इन इलाकों का फायदा उठा सकते हैं।
जम्मू के राजौरी और पुंछ जिलों में कई पहाड़ी गुफाएं मौजूद हैं, जहां सीमा पार से घुसपैठ करने वाले आतंकी अक्सर छिपने की कोशिश करते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन इलाकों पर खास नजर रखी जा रही है ताकि आतंकी किसी भी तरह का ठिकाना न बना सकें।
सेना के अनुसार यह पूरी कवायद शीतकालीन सुरक्षा योजना का हिस्सा है। सर्दियों में कोहरा और धुंध के साथ-साथ नागरिक आवाजाही भी कम हो जाती है, जिसका फायदा उठाकर आतंकी गतिविधियों के बढ़ने की आशंका रहती है। आने वाले दिनों में संभावित बर्फबारी को ध्यान में रखते हुए सेना ने प्रमुख मार्गों और पारंपरिक घुसपैठ रास्तों पर निगरानी और सख्त कर दी है।
जम्मू क्षेत्र में सियोज धार, चिंता, जय घाटी, थानाल्ला जंगल और भद्रवाह के आसपास गश्त को और तेज किया गया है। सैनिक स्नो गियर और आधुनिक उपकरणों से लैस होकर दिन-रात गश्त कर रहे हैं। इसके साथ ही सेना ने सर्दियों के लिए जरूरी रसद और सामान पहले ही जमा कर लिया है।
निगरानी को और मजबूत करने के लिए ड्रोन और आधुनिक सेंसर का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाए जा रहे हैं। सेना का कहना है कि उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सर्दियों के दौरान भी सुरक्षा में कोई ढील न आए और ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकियों को घुसपैठ का कोई मौका न मिल सके।
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