राजस्थान के जयपुर से सटे चौमूं कस्बे में शुक्रवार, 2 जनवरी 2026 की सुबह प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़े पैमाने पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू की। यह वही संवेदनशील इलाका है, जहां कुछ दिन पहले अतिक्रमण हटाने की कोशिश के दौरान हिंसक झड़प हुई थी और पुलिस पर पथराव की घटना सामने आई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इस बार कोई ढिलाई नहीं बरती और मौके पर भारी पुलिस बल, अतिरिक्त सुरक्षा संसाधन तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
प्रशासन के मुताबिक, चौमूं के बस स्टैंड क्षेत्र और उससे सटी सड़कों पर लंबे समय से लोहे की रेलिंग, पत्थर, सीढ़ियां, रैंप और प्लेटफॉर्म जैसे कई ढांचे अवैध रूप से बनाए गए थे, जो न केवल सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण थे बल्कि यातायात में भी गंभीर बाधा बन रहे थे। इन अतिक्रमणों के कारण आए दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती थी और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। प्रशासन द्वारा कई बार चेतावनी देने और नोटिस जारी करने के बावजूद जब अतिक्रमण नहीं हटाए गए, तो तय समयसीमा पूरी होने के बाद शुक्रवार सुबह चिन्हित अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए बुलडोजर चलाया गया।
राजस्थान में BJP सरकार एक्शन मोड में
चौमू में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान जयपुर मस्जिद के पास पथराव के कुछ दिनों बाद प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी।#Rajasthan #BulldozerAction #Chomu #BJPgovernment #AntiEncroachment
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— One India News (@oneindianewscom) January 2, 2026
पिछली हिंसक घटना को ध्यान में रखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। कार्रवाई के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल, दंगा नियंत्रण उपकरण और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पूरे अभियान के दौरान ड्रोन और फील्ड रिपोर्टिंग के जरिए हालात पर लगातार नजर रखी गई। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून और अदालत के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है और इसका उद्देश्य केवल अवैध अतिक्रमण हटाकर सार्वजनिक व्यवस्था को बहाल करना है, न कि किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना।
प्रशासन ने 29 दिसंबर 2025 को इलाके में अवैध निर्माणों, अवैध बूचड़खानों और पथराव के आरोपितों के घरों पर नोटिस चस्पा किए थे। इन नोटिसों के जरिए तीन दिन के भीतर जवाब देने और स्वयं अतिक्रमण हटाने का अवसर दिया गया था। हालांकि तय अवधि बीतने के बावजूद न तो अतिक्रमण हटाए गए और न ही नोटिसों का कोई संतोषजनक जवाब मिला। इसके बाद प्रशासन ने मजबूरी में कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया।
गौरतलब है कि चौमूं में 25 दिसंबर 2025 को बस स्टैंड इलाके में स्थित एक मस्जिद के बाहर पड़े पुराने पत्थरों और रेलिंग को हटाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। प्रशासन का कहना था कि ये सड़क पर किए गए अतिक्रमण थे और ट्रैफिक जाम की मुख्य वजह बन रहे थे। मुस्लिम प्रतिनिधियों से बातचीत के बाद शुरुआत में पत्थर हटाए गए, लेकिन बाद में दोबारा ढांचे को स्थायी रूप देने की कोशिश पर विरोध बढ़ गया। इसी दौरान हालात बिगड़ गए और भीड़ द्वारा पुलिस पर पथराव किया गया, जिसमें छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
पथराव की घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया और करीब दो दर्जन आरोपितों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई। पूरे इलाके में फ्लैग मार्च निकालकर स्थिति को नियंत्रण में लिया गया। अब उसी घटनाक्रम की कड़ी में प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण पर निर्णायक कार्रवाई करते हुए यह साफ संदेश दिया है कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ और सार्वजनिक भूमि पर कब्जा किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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