गणतंत्र दिवस के अवसर पर वीर सैनिकों को दिए जाने वाले वीरता पुरस्कार शौर्य चक्र के प्रशस्ति पत्र से भारतीय सेना के एक बड़े गुप्त सैन्य अभियान का खुलासा हुआ है। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने म्यांमार के भीतर सीमापार जाकर एक मजबूत और किले जैसे उग्रवादी कैंप को नष्ट किया था। इस कार्रवाई की जानकारी पहली बार आधिकारिक रूप से सार्वजनिक हुई है।
यह विशेष ऑपरेशन भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स द्वारा 11 से 13 जुलाई 2025 के बीच म्यांमार में अंजाम दिया गया था। ऑपरेशन की कमान 21 पैराशूट रेजिमेंट (स्पेशल फोर्स) के अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल घटगे आदित्य श्रीकुमार के हाथ में थी। उन्होंने मिशन की विस्तृत योजना तैयार की और स्वयं आगे रहकर जवानों का नेतृत्व किया। उनकी असाधारण वीरता और नेतृत्व क्षमता के लिए उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय सेना ने म्यांमार के भीतर स्थित एक ऐसे उग्रवादी कैंप को निशाना बनाया, जो भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले संगठन का प्रमुख ठिकाना था। सेना की तेज और सटीक कार्रवाई में कम से कम नौ हथियारबंद उग्रवादी मारे गए, जिनमें संगठन के कुछ शीर्ष नेता भी शामिल थे। इस हमले में पूरे उग्रवादी कैंप को पूरी तरह तबाह कर दिया गया।
गौरतलब है कि जुलाई 2025 में प्रतिबंधित यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) उर्फ उल्फा (आई) सहित कुछ उग्रवादी संगठनों ने दावा किया था कि म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में उनके ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए हैं, जिनमें उनके तीन वरिष्ठ नेता मारे गए। हालांकि, उस समय भारतीय सेना और सरकार ने इन दावों की न तो पुष्टि की थी और न ही किसी तरह की भूमिका स्वीकार की थी।
अब शौर्य चक्र के प्रशस्ति पत्र से स्पष्ट होता है कि यह कार्रवाई भारत-विरोधी उग्रवादी समूहों के खिलाफ की गई थी। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य भारत की सीमाओं को सुरक्षित रखना और सीमा पार से संचालित होने वाली आतंकी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना था। मिशन को पूरी तरह गोपनीय रखा गया, ताकि अभियान की सफलता और जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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