ईरान और इजरायल–अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच फारस की खाड़ी किनारे स्थित बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है।
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने दावा किया है कि 24 मार्च 2026 को प्लांट के आसपास हमला हुआ। वहीं अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पुष्टि की है कि एक प्रोजेक्टाइल प्लांट परिसर के भीतर गिरा, हालांकि किसी तरह का बड़ा नुकसान या जनहानि नहीं हुई।
IAEA के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी ने इस घटना पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। इससे पहले 17 मार्च को भी इसी क्षेत्र में एक और प्रोजेक्टाइल गिरा था। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि ऐसे ‘करीबी हमले’ बड़े परमाणु हादसे का कारण बन सकते हैं।
इस बीच Rosatom ने स्थिति को ‘नकारात्मक दिशा’ में जाता हुआ बताते हुए अपने विशेषज्ञों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की तैयारी शुरू कर दी है।
The IAEA has been informed by Iran that another projectile hit the premises of the Bushehr Nuclear Power Plant today. According to Iran, there was no damage to the NPP itself nor injuries to staff, and the condition of the plant is normal. IAEA DG @rafaelmgrossi reiterates call… pic.twitter.com/PngRf4w23O
— IAEA – International Atomic Energy Agency ⚛️ (@iaeaorg) March 24, 2026
खाड़ी देशों में भी इस घटना को लेकर चिंता बढ़ गई है। कुवैत ने अपने नागरिकों को संभावित रेडिएशन खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है और लोगों को घरों के अंदर रहने तथा सावधानी बरतने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यहां रेडिएशन लीक होता है, तो इसका असर फारस की खाड़ी के पानी पर पड़ सकता है, जिससे डीसैलिनेशन प्लांट और पीने के पानी की आपूर्ति पर गंभीर संकट आ सकता है।
बुशहर न्यूक्लियर प्लांट क्यों अहम?
बुशहर ईरान का एकमात्र सक्रिय परमाणु ऊर्जा संयंत्र है, जिसकी क्षमता करीब 1000 मेगावाट है। इसका निर्माण 1970 के दशक में शाह मोहम्मद रजा पहलवी के समय शुरू हुआ था, जिसे बाद में रूस की मदद से पूरा किया गया और 2011 में राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा गया।
यह संयंत्र न केवल ऊर्जा उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि रूस और ईरान के रणनीतिक संबंधों का भी प्रतीक है।
मिसाइल और ड्रोन ताकत से बढ़ा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान के पास मध्य पूर्व का सबसे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल भंडार है, जिसकी मारक क्षमता 2000 किमी तक है। इसके अलावा, ईरान की ड्रोन तकनीक भी तेजी से विकसित हुई है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता और मजबूत हुई है।
बुशहर जैसे संवेदनशील परमाणु संयंत्र के पास हमले की घटनाएं वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही हैं।
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