राम नवमी 2026 पर राम मंदिर अयोध्या में एक ऐतिहासिक और अलौकिक दृश्य देखने को मिलेगा। शुक्रवार (27 मार्च) दोपहर ठीक 12 बजे, जब मंदिर परिसर ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंजेगा, उसी समय रामलला के मस्तक पर सूर्य की किरणें ‘तिलक’ के रूप में विराजमान होंगी।
यह अनोखा दृश्य आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम होगा, जिसे देश-दुनिया के लोग लाइव प्रसारण के माध्यम से देख सकेंगे।
कैसे काम करता है ‘सूर्य तिलक’ सिस्टम
इस विशेष आयोजन के लिए एक अत्याधुनिक ऑप्टो-मैकेनिकल सिस्टम विकसित किया गया है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले दर्पण और लेंस लगाए गए हैं, जो सूर्य की किरणों को मंदिर की ऊपरी संरचना से होते हुए सीधे गर्भगृह तक पहुँचाते हैं।
यह तकनीक करीब 4 मिनट तक सूर्य की किरणों को रामलला के मस्तक पर केंद्रित रखती है, जिससे ‘तिलक’ का दिव्य दृश्य बनता है। इस सिस्टम को केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान और बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने महीनों के शोध और परीक्षण के बाद तैयार किया है।
धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान राम सूर्यवंशी थे और सूर्य देव को उनका कुलदेवता माना जाता है। ऐसे में राम नवमी के दिन सूर्य की किरणों द्वारा तिलक किया जाना सूर्य देव के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की तैयारी
राम नवमी के अवसर पर अयोध्या में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने की उम्मीद है। प्रतिदिन 1 लाख से अधिक भक्त दर्शन के लिए आ रहे हैं। भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर के बाहर LED स्क्रीन लगाई जा रही हैं, ताकि दूर खड़े श्रद्धालु भी इस दिव्य क्षण का आनंद ले सकें।
पूरे आयोजन का लाइव प्रसारण दूरदर्शन और अन्य चैनलों पर किया जाएगा।
परंपरा और तकनीक का संगम
इस ‘सूर्य तिलक’ की परिकल्पना नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी, जिसे वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक से साकार किया। लगातार ट्रायल के बाद इस प्रणाली को इतना सटीक बनाया गया है कि आने वाले 20 वर्षों तक हर राम नवमी पर यह आयोजन संभव होगा।
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