आंबेडकर जयंती के अवसर पर सोमवार को संसद परिसर में राजनीतिक सौहार्द की एक महत्वपूर्ण झलक देखने को मिली। संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि देने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच हल्की-फुल्की बातचीत हुई।
इस दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और कुछ समय तक मुस्कुराते हुए बातचीत करते नजर आए। कार्यक्रम में मौजूद अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी डॉ. आंबेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरा आयोजन औपचारिक रहा, लेकिन पीएम मोदी और खड़गे के बीच हुई यह मुलाकात राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सौहार्दपूर्ण माहौल का संकेत मानी जा रही है।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi and Congress national president Mallikarjun Kharge share a light-hearted moment
PM Modi and other leaders paid tribute to Bharat Ratna Dr BR Ambedkar at Prerna Sthal in the parliament premises on the occasion of Ambedkar Jayanti.… https://t.co/JoquMq3m4d pic.twitter.com/vN3KkG63j1
— ANI (@ANI) April 14, 2026
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और अन्य नेताओं ने भी प्रेरणा स्थल पर पहुंचकर डॉ. भीमराव आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी। हर साल की तरह इस बार भी संसद परिसर में बड़ी संख्या में नेता और आम लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
आम जनता के लिए खुला प्रेरणा स्थल
आंबेडकर जयंती के अवसर पर संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल आम जनता के लिए भी खोला जाता है, जहां हजारों लोग डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचते हैं।
पहले भी दिखी राजनीतिक सौहार्द की झलक
इसी तरह का एक और दृश्य 11 अप्रैल को महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती के अवसर पर देखने को मिला था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच संसद परिसर में लंबी बातचीत हुई थी। वीडियो में दोनों नेताओं को आपसी संवाद करते हुए देखा गया था, जिसे राजनीतिक शिष्टाचार और सौहार्द का संकेत माना गया।
दो शब्दों संदेश के
- संसद परिसर में B. R. Ambedkar को श्रद्धांजलि के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं का एक साथ आना लोकतांत्रिक परंपराओं की मजबूती को दर्शाता है।
- Narendra Modi और विपक्षी नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण बातचीत यह संकेत देती है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।
- ऐसे अवसर राष्ट्रीय एकता, सम्मान और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश देते हैं।
“यह दृश्य दर्शाता है कि लोकतंत्र में विचारों के मतभेद के बावजूद आपसी सम्मान और संवाद ही देश की राजनीतिक संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत है।”
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