उत्तर प्रदेश के Noida में 13 अप्रैल को हुई हिंसा को लेकर पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, अब तक गिरफ्तार किए गए 66 आरोपितों में से 45 लोग कथित तौर पर बाहरी पाए गए हैं, जो फैक्ट्री मजदूर नहीं थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आगजनी और पथराव की घटनाओं को अंजाम देने के लिए भीड़ में शामिल कई लोग खुद को मजदूर बताकर पहुंचे थे। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, यह हिंसा एक संगठित प्रयास का हिस्सा हो सकती है, जिसमें श्रमिकों को भड़काने और माहौल खराब करने की कोशिश की गई।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां इस मामले में कुछ संगठनों और नेटवर्क से संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं, हालांकि इन कड़ियों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मामले की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हिंसा में शामिल गैर-मजदूर आरोपितों की पहचान कर उनकी तस्वीरें सार्वजनिक की जाएं, ताकि ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर निगरानी बढ़ाने और अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वास्तविक मजदूरों के हितों की रक्षा की जाएगी, लेकिन हिंसा फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाएगी।
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले में फंडिंग, नेटवर्क और साजिश के एंगल से गहराई से जांच कर रही है।
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