महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर Lok Sabha में हुई वोटिंग में सरकार को झटका लगा है। बिल के पक्ष में 278 वोट पड़े, जबकि विरोध में 211 वोट आए। हालांकि, संवैधानिक संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण यह विधेयक सदन में पारित नहीं हो सका।
इस घटनाक्रम के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है और National Democratic Alliance (NDA) ने इस मुद्दे पर बैठक बुलाई है।
उधर, उद्धव गुट की सांसद Priyanka Chaturvedi ने इस फैसले को महिलाओं के लिए निराशाजनक बताते हुए कहा कि यह उन महिलाओं के लिए दुखद दिन है जो संसद और विधानसभा में प्रतिनिधित्व की उम्मीद कर रही थीं।
Lok Sabha Speaker Om Birla says, "The Constitution (131st Amendment) Amendment Bill did not pass as it did not achieve a 2/3 majority during voting in the House." https://t.co/ucLnUltYnj pic.twitter.com/xcBUJ3RhAv
— ANI (@ANI) April 17, 2026
सदन में चर्चा के दौरान गृह मंत्री Amit Shah ने कहा कि सरकार महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि Indian National Congress और अन्य दल लगातार सरकार के हर बड़े फैसले का विरोध करते रहे हैं।
अमित शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में 2029 तक महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य हासिल किया जाएगा और अगला लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराया जाएगा।
संख्या बल में कहाँ पिछड़ी सरकार?
Lok Sabha में NDA के पास 293 सांसद हैं, जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं। लेकिन संवैधानिक संशोधन के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। यदि सभी 540 सदस्य मौजूद होते, तो 360 वोट जरूरी थे।
Sad day for India’s women who hoped to find themselves in the parliament or assembly. pic.twitter.com/Ln95uAPrvy
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) April 17, 2026
ऐसी स्थिति में सरकार को विपक्षी दलों के समर्थन या उनकी अनुपस्थिति की जरूरत थी। Samajwadi Party, All India Trinamool Congress और Dravida Munnetra Kazhagam जैसे दलों की भूमिका अहम मानी जा रही थी, लेकिन इन दलों ने सरकार का साथ नहीं दिया।
आगे क्या?
लोकसभा में पास न होने के कारण अब यह विधेयक Rajya Sabha में पेश नहीं किया जाएगा। राज्यसभा में भी सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है, जिससे इस बिल के पारित होने की संभावना फिलहाल कम नजर आ रही है।
महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर राजनीतिक सहमति की कमी एक बार फिर सामने आई है, जिससे देश में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर बहस और तेज हो गई है।
हमारी यूट्यूब चैनल को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करे
Like, Share and Subscribe our YouTube channel