जलवायु परिवर्तन का भारतीय कृषि पर प्रभाव: सरकार ने लोकसभा में दी जानकारी
लोकसभा में सरकार ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का देश की कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिससे रबी, खरीफ और जायद की फसलें प्रभावित होंगी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह जानकारी हरियाणा के भिवानी-महेंद्रगढ़ से सांसद धर्मवीर सिंह के सवाल के जवाब में दी।
आईसीएआर अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष:
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने सिमुलेशन मॉडलिंग अध्ययन के जरिए मिट्टी के क्षरण, बारिश के पैटर्न और फसल उत्पादन पर प्रभाव का विश्लेषण किया।
बारिश के बदलाव का अनुमान:
- खरीफ की बारिश:
- 2050 तक 4.9% से 10.1% बढ़ सकती है।
- 2080 तक 5.5% से 18.9% तक बढ़ने का अनुमान।
- रबी की बारिश:
- 2050 तक 12% से 17% बढ़ सकती है।
- 2080 तक 13% से 26% तक बढ़ने की संभावना।
- बारिश में हुई बढ़ोतरी से 2050 तक प्रति हेक्टेयर 10 टन मिट्टी के क्षरण का खतरा।
फसलों की पैदावार पर असर:
- धान (बारिश पर निर्भर)
- 2050 तक उत्पादन 20% तक घटने का अनुमान।
- 2080 तक 10% से 47% की गिरावट संभव।
- धान (सिंचित भूमि में)
- 2050 तक 3.5% और
- 2080 तक 5% तक उत्पादन में गिरावट।
- गेहूं
- 2050 तक उत्पादन 19.3% घट सकता है।
- 2080 तक 40% तक गिरावट की आशंका।
- खरीफ मक्का
- 2050 तक 10% से 19% तक कमी।
- 2080 तक उत्पादन में 20% से अधिक गिरावट की संभावना।
क्या करने की जरूरत?
कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु अनुकूलन उपायों को नहीं अपनाने पर कृषि उत्पादन में गंभीर गिरावट आ सकती है। इसके लिए सरकार सतत कृषि पद्धतियों, जल प्रबंधन और नई तकनीकों को बढ़ावा देने पर काम कर रही है।
निष्कर्ष: जलवायु परिवर्तन भारतीय कृषि के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है। यदि समय पर उचित नीतियां नहीं अपनाई गईं, तो कृषि उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा पर गहरा असर पड़ेगा।