यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा कृषि भूमि की कीमतों में वृद्धि का प्रस्ताव किसानों के लंबे समय से चले आ रहे विरोध के बाद लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है।
मुख्य बिंदु:
✅ नई दरें: यीडा अब किसानों से कृषि भूमि 3,400 रुपये प्रति वर्ग मीटर के बजाय 4,300 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से खरीदेगा।
✅ विरोध के कारण निर्णय: किसानों ने मांग की थी कि नोएडा एयरपोर्ट के लिए बढ़ी हुई दरों को औद्योगिक और शहरीकरण परियोजनाओं की भूमि के लिए भी लागू किया जाए।
✅ यीडा बोर्ड बैठक: यह प्रस्ताव 28 मार्च को होने वाली यीडा की बोर्ड बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
✅ सीईओ अरुण वीर सिंह का बयान: यीडा सुनिश्चित करेगा कि हवाई अड्डे की परियोजना से बाहर अन्य विकास परियोजनाओं के लिए भी किसानों को समान मूल्य मिले।
✅ किसानों की प्रतिक्रिया: मिर्जापुर गांव के किसान मुकेश भाटी ने इस फैसले का स्वागत किया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि यदि दरें नहीं बढ़ाई जातीं तो किसान अपनी जमीन देने को तैयार नहीं होते।
पृष्ठभूमि:
- दिसंबर 2024 में नोएडा एयरपोर्ट प्रोजेक्ट (फेज 3 और 4) के लिए अधिग्रहित भूमि की दर 3,400 से बढ़ाकर 4,300 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दी गई थी, लेकिन कृषि भूमि पर यह वृद्धि लागू नहीं की गई थी।
- इससे पहले अक्टूबर 2022 में भी दरें 2,650 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़ाकर 3,400 रुपये प्रति वर्ग मीटर की गई थीं।
- किसानों के विरोध के चलते अब यह वृद्धि सभी विकास परियोजनाओं पर लागू करने की तैयारी हो रही है।
इस फैसले का महत्व:
🔹 किसानों के आर्थिक हितों की सुरक्षा: भूमि अधिग्रहण में बढ़ी हुई दरों से किसानों को अधिक मुआवजा मिलेगा।
🔹 औद्योगिक विकास को बढ़ावा: उचित मूल्य मिलने से किसान सहमति से जमीन देंगे, जिससे औद्योगिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी आएगी।
🔹 सरकार और किसानों के बीच सामंजस्य: यह निर्णय किसानों और सरकार के बीच संवाद और संतुलन को दर्शाता है, जिससे भविष्य में भूमि अधिग्रहण में विवाद कम हो सकते हैं।
अगर 28 मार्च की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह उत्तर प्रदेश में भूमि अधिग्रहण नीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगा।