बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के जाने के बाद से वहां राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा बढ़ी है, जिसका असर भारत की पूर्वोत्तर सीमा पर साफ दिख रहा है। अवैध घुसपैठ की घटनाएं बढ़ रही हैं, खासकर असम और पश्चिम बंगाल की सीमा पर।
असम में अवैध घुसपैठ पर सख्ती
- असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि श्रीभूमि जिले में दो बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़कर वापस भेज दिया गया।
- असम पुलिस और बीएसएफ ने राज्य की 267.5 किमी लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है।
- श्रीभूमि के सुतारकंडी आईसीपी (Integrated Check Post) समेत भारत-बांग्लादेश सीमा के तीन प्रमुख आईसीपी पर निगरानी कड़ी कर दी गई है।
Stern action against illegal infiltration.
Continuing with their strict vigil along the Indo-Bangladesh border, @sribhumipolice intercepted 2 Bangladeshi nationals and pushed them back.
🇧🇩Irfan Khan
🇧🇩Nurul Afsar
This strict monitoring by @assampolice will continue. Good job. pic.twitter.com/EkIokqODjF
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) March 18, 2025
बांग्लादेशी घुसपैठ का कारण
- बांग्लादेश में सरकार बदलने के बाद वहां हिंसा और असुरक्षा का माहौल है।
- संप्रदायिक हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक भारत की ओर भागने की कोशिश कर रहे हैं।
- आर्थिक संकट और बेरोजगारी के कारण बांग्लादेश के कई नागरिक अवैध रूप से भारत में घुसने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत की प्रतिक्रिया
- असम और मेघालय में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
- बीएसएफ और राज्य पुलिस को चौकसी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
- पासपोर्ट धारक भारतीयों को बांग्लादेश से वापस आने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
- मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि असम बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं बनेगा।
भविष्य की संभावनाएं
- अगर बांग्लादेश में अस्थिरता बनी रही तो अवैध घुसपैठ और बढ़ सकती है।
- असम और पश्चिम बंगाल में सुरक्षा एजेंसियों का दबाव और बढ़ेगा।
- केंद्र सरकार इस मुद्दे पर बांग्लादेश से कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर सकती है।
- असम में एनआरसी (NRC) और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर फिर से बहस तेज हो सकती है।