बिहार के मधुबनी जिले में आतंकवाद और कट्टरपंथी गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। बिहार ATS और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मधुबनी जिले से 50 वर्षीय मदरसा संचालक इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि वह एक संदिग्ध कट्टरपंथी मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था और कथित रूप से नेटवर्क के लिए फंडिंग और संपर्क समन्वय का काम देखता था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजहार-उल-हक मधुबनी जिले के पंडौल थाना क्षेत्र में किराए के मकान में रहकर एक मदरसा संचालित कर रहा था। प्रारंभिक जांच में उसके मोबाइल फोन से कई आपत्तिजनक और भड़काऊ वीडियो मिलने की बात सामने आई है। इनमें कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा और शरीयत कानून से संबंधित सामग्री भी शामिल बताई जा रही है।
मस्जिद से गिरफ्तारी, ट्रांजिट रिमांड पर भोपाल ले जाएगी ATS
जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने इजहार-उल-हक को भाओड़ा गांव स्थित एक मस्जिद से हिरासत में लिया। बाद में उसे मधुबनी की अदालत में पेश किया गया, जहां से मध्य प्रदेश ATS को 20 जून 2026 तक का ट्रांजिट रिमांड मिल गया।
अब उसे आगे की पूछताछ के लिए भोपाल ले जाया जाएगा, जहां पहले से गिरफ्तार अन्य संदिग्धों से उसके संबंधों की जांच की जाएगी।

पांच राज्यों में फैले मॉड्यूल की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय एक कथित कट्टरपंथी नेटवर्क की जांच का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि इजहार-उल-हक की गिरफ्तारी इस मॉड्यूल से जुड़ा छठा बड़ा एक्शन है।
इससे पहले भोपाल के काजीकैंप इलाके से मोहम्मद फराज उर्फ खालिद को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया गया, जिसके बाद विभिन्न राज्यों में कार्रवाई की गई।
पहले भी हुई कई गिरफ्तारियां
जांच एजेंसियों ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम अब्दुल्ला, राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव, मध्य प्रदेश के धार जिले से हाजी अजहर और हरियाणा के नूंह से शाकिर नामक संदिग्ध को गिरफ्तार किया था।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय था और युवाओं को प्रभावित करने, संपर्क बढ़ाने तथा आर्थिक सहयोग जुटाने का काम कर रहा था।
डिजिटल गतिविधियों और फंडिंग की जांच
ATS और अन्य केंद्रीय एजेंसियां अब इजहार-उल-हक के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट्स, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नेटवर्क को फंडिंग कहां से मिल रही थी और इसके अन्य सदस्य किन क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
जांच अधिकारियों का कहना है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों में भी कार्रवाई की जा सकती है।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर
गिरफ्तारी के बाद बिहार और अन्य संबंधित राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है। पुलिस और खुफिया विभाग संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि देश की सुरक्षा से जुड़े किसी भी नेटवर्क को बख्शा नहीं जाएगा और जांच पूरी तरह कानून के दायरे में की जा रही है।
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