भारत ने कोयला उत्पादन में एक अरब टन (1 बिलियन टन) का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य बिंदु:
- घोषणा: केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने इसकी घोषणा की।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया:
- उन्होंने इसे “गर्व का क्षण” बताया और कहा कि यह ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक प्रगति की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- यह उपलब्धि इस क्षेत्र के श्रमिकों और उद्योग से जुड़े लोगों की कड़ी मेहनत का परिणाम है।
- उन्नत तकनीकों और टिकाऊ खनन:
- अत्याधुनिक तकनीकों और कुशल खनन प्रक्रियाओं के कारण यह उपलब्धि हासिल हुई।
- टिकाऊ और जिम्मेदार खनन सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दिया गया।
इस उपलब्धि का महत्व:
- ऊर्जा सुरक्षा: बढ़ते उद्योगों और घरों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
- आर्थिक विकास: अधिक कोयला उत्पादन से बिजली उत्पादन लागत घटेगी और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- आत्मनिर्भर भारत: देश की कोयला निर्भरता आयात पर कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- वैश्विक ऊर्जा नेतृत्व: यह उपलब्धि भारत को वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेगी।
आगे की दिशा:
- सरकार कोयला गैसीकरण, टिकाऊ खनन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने पर काम कर रही है।
- “मिशन कोल गैसीफिकेशन” के तहत, 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीकरण का लक्ष्य रखा गया है।
- कोयला परिवहन में सुधार के लिए रेलवे और लॉजिस्टिक्स को मजबूत किया जा रहा है।
यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा नीति की दिशा में एक मील का पत्थर है, जो सुरक्षित, सुलभ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की ओर संकेत करती है।