मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और Strait of Hormuz में बाधा के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे समय में Russia ने भारत को तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बढ़ाने का बड़ा प्रस्ताव दिया है।
रूस के पहले डिप्टी प्रधानमंत्री Denis Manturov की भारत यात्रा के दौरान यह संकेत दिया गया कि मॉस्को भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है।
मोदी और जयशंकर से मुलाकात
इस दौरान Narendra Modi और S. Jaishankar के साथ बैठक में ऊर्जा, उर्वरक, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे “म्यूचुअली बेनिफिशियल कोऑपरेशन” बताया, जबकि जयशंकर ने कहा कि बातचीत का मुख्य फोकस ऊर्जा और औद्योगिक सहयोग पर रहा।
रूस का दावा: सप्लाई बढ़ाने की पूरी क्षमता
रूसी पक्ष का कहना है कि उनकी कंपनियां भारत को तेल और एलएनजी की सप्लाई बढ़ाने में सक्षम हैं। साथ ही 2025 के अंत तक उर्वरकों की सप्लाई में 40% तक बढ़ोतरी का भी दावा किया गया है।
होर्मुज संकट और भारत पर असर
ईरान से जुड़े तनाव के बाद होर्मुज स्ट्रेट में बाधा के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इससे भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए ऊर्जा आपूर्ति चुनौतीपूर्ण हो गई है।
ऐसे में रूस का यह प्रस्ताव भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर तब जब भारत पहले से ही रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता रहा है।
न्यूक्लियर और अन्य सेक्टर में सहयोग
इस दौरे में Kudankulam Nuclear Power Plant प्रोजेक्ट सहित न्यूक्लियर एनर्जी, टेक्नोलॉजी, स्पेस और एजुकेशन सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
रणनीतिक संतुलन की चुनौती
हालांकि इस प्रस्ताव के साथ भारत के सामने एक संतुलन की चुनौती भी है—एक ओर सस्ता और स्थिर ऊर्जा स्रोत, तो दूसरी ओर पश्चिमी देशों के साथ कूटनीतिक रिश्ते।
फिलहाल, मौजूदा वैश्विक संकट में भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
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