चंडीगढ़ पुलिस विभाग में चल रही अंदरूनी खींचतान के कारण डीजीपी सुरेंद्र यादव का मंगलवार (2 अप्रैल, 2025) को ट्रांसफर कर दिया गया। गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर उन्हें बीएसएफ (Border Security Force) में डीआईजी के पद पर नियुक्त किया है। जब तक नया डीजीपी नियुक्त नहीं होता, तब तक आईजी राजकुमार सिंह कार्यभार संभालेंगे।
डीजीपी सुरेंद्र यादव के कार्यकाल में विवाद क्यों?
🔹 बड़े पैमाने पर पुलिस ट्रांसफर: उन्होंने पुलिस कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर तबादले किए थे।
🔹 सब-इंस्पेक्टर को एसएचओ नियुक्त किया: एक सब-इंस्पेक्टर को थाना प्रभारी (SHO) बनाकर पुलिस अधिकारियों को चौंका दिया।
🔹 पुलिस विभाग में असंतोष: उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर थाना प्रभारी सही ढंग से काम नहीं करेंगे तो सब-इंस्पेक्टरों को एसएचओ बनाने का मौका दिया जाएगा।
🔹 वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद: उनके कई फैसलों के कारण पुलिस अधिकारियों और डीसीपी के साथ खींचतान चल रही थी।
क्या विवाद के कारण हुआ ट्रांसफर?
➡️ उनके समय से पहले ट्रांसफर से यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि पुलिस विभाग में चल रहे मतभेद के चलते यह फैसला लिया गया।
➡️ पंजाब सरकार ने हाल ही में 2 आईपीएस और 14 पीपीएस अधिकारियों के भी ट्रांसफर किए थे।
➡️ नई नियुक्तियाँ:
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आईपीएस दयमा हरीश कुमार समेत 7 पीपीएस अधिकारियों को विजिलेंस ब्यूरो, पंजाब भेजा गया।
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आईपीएस अरविंद मीणा को एसपी हेडक्वार्टर, रूपनगर नियुक्त किया गया।
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विजिलेंस ब्यूरो में हरप्रीत सिंह, लखबीर सिंह, मंजीत सिंह, स्वरनदीप सिंह, हरप्रीत सिंह मंडेर, राजपाल सिंह और रुपिंदर कौर सरां को तैनात किया गया।
चंडीगढ़ पुलिस में प्रशासनिक खींचतान और अंदरूनी असंतोष के कारण डीजीपी सुरेंद्र यादव का समय से पहले ट्रांसफर कर दिया गया। अब वे बीएसएफ में डीआईजी के रूप में अपनी सेवाएँ देंगे। उनका कार्यकाल लगातार सख्त फैसलों और विभागीय संघर्षों की वजह से सुर्खियों में रहा।